चित्रकूट। झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग के रसिन मोड़ पर ट्रक के ओवरटेक के दौरान अनियंत्रित कार सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। इससे कार चालक की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस पर अस्पताल पहुंचाने में देरी व अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा सही इलाज न करने से मौत का कारण बताकर हंगामा काटा। शव को अस्पताल गेट पर रखकर जाम लगा दिया। पुलिस ने जोर जबरदस्ती कर शव को वहां से परिजनों के विरोध के बीच में उठवाकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया।
बांदा जिले के तुर्रा गांव निवासी प्रदीप गौतम (29) सीतापुर स्थित रामघाट के पास किराये के कमरे में रहकर प्राइवेट वाहन चलाता था। रविवार की रात पत्नी लक्ष्मी की तबीयत खराब होने पर दवा कराने के लिए दोस्त की कार लेकर गांव जा रहा था। देर रात हाईवे के रसिन मोड़ के पास अचानक वाहन पेड़ से टकरा गया।
भाई कुलदीप गौतम ने बताया कि पीछे से तेज रफ्तार से आए ट्रक ने कार को ओवरटेक किया। सटाकर ट्रक निकाला तो भाई ने डरकर कार सड़क से नीचे उतारा और अनियंत्रित कार पेड़ से टकरा गई। सूचना पर पहुंची पुलिस घायल को सीएचसी शिवरामपुर लाई। हालत गंभीर देखकर डाॅक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। इलाज के दौरान मौत हो गई।
इधर, परिजन भी जिला अस्पताल पहुंच गए। सोमवार को सवेरे परिजनों ने शव को जिला अस्पताल के गेट के बाहर रखकर विरोध जताया। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस और डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मौत हुई है। जिला अस्पताल लाते समय प्रदीप की सांसें चल रही थीं। अगर समय से डाॅक्टर सही इलाज करते तो जान बच सकती थी। पुलिस ने भी अस्पताल पहुंचाने में देरी की।
जाम की सूचना पर सीओ सिटी हर्ष पांडेय व कोतवाली अजीत कुमार पांडेय पुलिस टीम के साथ पहुंचे। मान मनौव्वल कर शव को पोस्टमार्टम के लिए वाहन में रखने लगे, लेकिन परिजन फिर भड़क गए। लगभग आधे घंटे तक परिजन दोषी पुलिसकर्मी व डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते रहे। पुलिस ने वाहन में शव रखकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया।