एक तरफ किसान सिंचाई के लिए पानी न मिलने से परेशान है, दूसरी तरफ बरूआ बांध की नहर कटने से हजारों लीटर पानी से दो सैकड़ा बीघे की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों ने बताया कि चना व मसूर की फसल को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने इसके लिए अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि विभाग का कहना कि कुछ किसानों ने फसल के लिए जानबूझकर नहर काटी है और इससे बेहद कम नुकसान हुआ है। किसानों ने इस फसल के नुकसान का मुआवजा मांगा है।
शिवरामपुर क्षेत्र के बरूआ बांध से जुड़ी नहर का पानी दो दर्जन से अधिक गांवों के किनारे से निकलता है। शुक्रवार को भसौंधा व तरावं के बीच नहर कटने से पानी आसपास के खेतों में भर गया। किसानों ने किसी तरह नहर के पानी को रोककर अधिकारियों को सूचना दी। गांव के अशोक कुमार, छेदीलाल, देवीप्रसाद, मनोज कुमार, राजकुमार, कल्लू आदि ने बताया कि कई दिन पहले सिंचाई विभाग के जेई देवपाल से नहर का हिस्सा कमजोर व टूटा होने की जानकारी दी थी, लेकिन उसे नहीं बनवाया गया। शुक्रवार को जब नहर चालू हुई तो पानी के वेग से नहर कटी और लगभग दो सैकड़ा की चना व मसूर की फसल प्रभावित हो गई।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अमरनाथ गुप्ता ने टीम के साथ पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होेंने कटी नहर को बंद कराने के बाद कहा कि इसमें विभाग की लापरवाही नहीं बल्कि कुछ किसानोें ने अपने खेत में सिंचाई के लिए नहर काट दी। गेहूं बोने वाले किसानों ने कुछ दिन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष मैना देवी व डीएम शिवाकंात द्विवेदी से नहर चलवाने की मांग की थी। किसानों ने बताया था कि उनकी फसलें सूख रही हैं। इसके बाद ही नहर चालू की गई थी। वैसे भी इस समय बांध में पानी कम बचा है। जब पानी चालू किया गया तो कुछ लोगों ने सिंचाई के लिए नहर काट दी है। फिलहाल जिन खेतों में जलभराव हुआ है, वहां ज्यादा नुकसान नहीं है।