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Chitrakoot News: मारपीट व जान से मारने की धमकी में दो जमानत

Fri, 01 May 2026 12:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद भारती की अदालत ने मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के दो अलग-अलग मामलों में आरोपी शैलेंद्र यादव और मेहंदी हसन को जमानत दे दी है। न्यायालय ने दोनों को 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की एक जमानती दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया है।
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आरोपी शैलेंद्र यादव के खिलाफ वर्ष 2020 में कर्वी थाने में घर में घुसकर मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जबकि आरोपी मेहंदी हसन के खिलाफ वर्ष 2024 में भरतकूप थाने में प्राथमिकी दर्ज की थी। मेहंदी पर मारपीट व जान-माल की धमकी देने के आरोप में थे। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरोपी शैलेंद्र यादव व मेहंदी हसन ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। दोनों न्यायिक अभिरक्षा में थे। दोनों के अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में इनकी जमानत अर्जियां डाली थी। न्यायालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपियों को निर्दोष बताते हुए रंजिशन फंसाने का तर्क दिया। हालांकि, अभियोजन अधिकारी ने दोनों अभियुक्तों की जमानत का विरोध किया था। न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुना और पत्रावली का अवलोकन किया। बाद में अदालत ने इन मामलों में जमानत का पर्याप्त आधार पाया। इस पर उन्होंने आरोपी शैलेंद्र यादव और मेहंदी हसन की जमानत अर्जियां स्वीकार कर ली।




चोरी व दुष्कर्म के मामले में दो की जमानत अर्जियां खारिज



चित्रकूट। न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद भारती ने संपत्ति चोरी व दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में आरोपी कामता प्रसाद मौर्य और अनिल रैदास की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने पाया कि दोनों पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के और अजमानतीय हैं।
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कोतवाली कर्वी में पुलिस ने वर्ष 2026 में संपत्ति चोरी के मामले में कामता प्रसाद मौर्य ने प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में है। इस मामले में अधिवक्ता ने आरोपी कामता प्रसाद मौर्य की अदालत में जमानत अर्जी डाली थी। सुनवाई में न्यायाधीश ने पक्ष व विपक्ष दोनों की दलीलें सुनीं। न्यायालय ने आरोपी पर लगे गंभीर आरोपों को देख उसकी जमानत अर्जी निरस्त कर दी। इसी प्रकार मानिकपुर थाने में अनिल रैदास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। वर्ष 2026 में उस पर दुष्कर्म का आरोप है। आरोपी अनिल रैदास जेल में है। दर्ज मामले में अधिवक्ता ने अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया था। सुनवाई में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है, साथ ही उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। हालांकि, अभियोजन अधिकारी ने जमानत का प्रबल विरोध किया। अभियोजन प्रपत्र का अवलोकन करने के बाद पाया कि यह मामला सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय हैं। आरोपी पर लगे आरोप गंभीर है। ऐसे में जमानत का कोई पर्याप्त आधार नहीं। उन्होंने आरोपी अनिल की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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