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Chitrakoot News: आठ साल से एक ही बिजली कनेक्शन पर चल रही थीं 27 मशीनें

Sat, 22 Aug 2026 11:58 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। बांदा-चित्रकूट में पान मसाला कारोबारी के यहां 185 करोड़ की कर चोरी का खुलासा होने के बाद जांच में कई अहम जानकारियां सामने आईं हैं।
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पता चला है कि आठ साल से एक ही बिजली कनेक्शन पर 27 पान मसाला, जर्दा बनाने की मशीनें चल रहीं थीं। इसमें ज्यादातर माल नकली होता था।
सूत्रों के अनुसार जिले में 10 से अधिक जगहों पर नकली पान मसाला, घी और नमकीन बनाने का अवैध धंधा चल रहा था। सबसे बड़ा खेल जिला मुख्यालय के गंगाजी रोड और शंकर बाजार स्थित मुख्य आवास व गोदाम में चल रहा था।
छापे के दौरान संचालक ने बताया कि तीन मशीनें हैं। लेकिन जब जांच टीम के अफसरों ने बिजली का बटन दबाया तो 27 मशीनें चलने लगीं। सामने तीन व अंदर कमरे में 24 मशीनें लगीं थीं। इनके जरिए पैकिंग और पाउच बनाए जा रहे थे। बताया गया कि आठ साल से एक लाइसेंस और एक बिजली कनेक्शन व 27 मशीनें संचालित हो रही थीं।
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छापे के बाद इस कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह रही कि जिले के सीजीएसटी विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। लखनऊ के खुफिया महानिदेशालय की टीमों ने छापा मारकर 185 करोड़ के नकली पान मसाला, गुटखा और घी के काले कारोबार का पर्दाफाश किया। टीम ने एक साथ जिले में छह ठिकानों पर छापा मारा था।
एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। नकली कारोबार कानपुर, लखनऊ, नोएडा से लेकर पंजाब तक फैला है। डिप्टी कमिश्नर विक्रम अजीत सोनी ने बताया कि यह कार्रवाई लखनऊ की टीम ने की है। स्थानीय विभाग को इसकी सूचना तक नहीं दी गई है।


कोरोना काल में कानपुर में किया था कारोबार

कानपुर। चित्रकूट में पकड़े गए 185 करोड़ के जीएसटी चोरी के आरोपी ने कोरोना काल में कानपुर में भी अपना साम्राज्य फैलाया था। वहां भी करोड़ों रुपये का कारोबार किया था। जिससे आरोपी ने खूब कमाई की थी। लॉक डाउन के दौरान भी चोरी छिपे बंद गोदामों में उत्पाद तैयार किया जाता था।
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सवालों में उधड़ गई परतें, ऐसे खुला 27 मशीनों का राज
चित्रकूट। लखनऊ से आई टीम ने भी नहीं सोचा था कि छोटे से शहर में नकली का इतना बड़ा साम्राज्य पनप रहा होगा। टीम जब मुख्य आवास में दाखिल हुई तो शुरू में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन अफसरों के सवालों ने सेठ के झूठ की परतें प्याज की तरह उधेड़ दीं।
एक सवाल, फिर दूसरा, फिर तीसरा... हर सवाल पर व्यापारी का जवाब लड़खड़ाने लगा। कागज पर तीन मशीनें, मौके पर आवाज 27 की। जब अफसरों ने सख्ती से पूछताछ की तो पूरा जाल सामने आ गया। आठ साल से चल रहा खेल आखिरकार एक-एक सवाल में बेनकाब हो गया।
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रसूख इतना कि किसी ने फैक्टरी की ओर झांका
चित्रकूट। आठ साल... शहर में आठ साल से मौत के पाउच बन रहे थे। हैरानी ये कि सेठ का रसूख इतना बड़ा कि स्थानीय अमले ने कभी फैक्टरी की तरफ झांका तक नहीं। कागज में एक लाइसेंस, दीवार पर एक बिजली कनेक्शन और अंदर 27 मशीनें बेलगाम... धड़-धड़ पाउच उगलती रहीं, बाजार में जहर परोसती रहीं।
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