पन्ना टाइगर्स प्रोजेक्ट से भागकर पाठा के जंगलों में आई बाघिन वनकर्मियों के हाथ आने से रह गई। टीम को वह मुश्किल से मारकुंडी के जंगल में नजर आई। टीम से सामना होने पर कर्मियों ने मोबाइल से बाघिन की फोटो खींची। लेकिन जब तक उसे पकड़ने वाले कुशल वनकर्मी पहुंचते वह जंगल में भाग निकली और वन विभाग की टीम हाथ मलते गई।
पड़ोसी जनपद पन्ना के टाइगर्स प्रोजेक्ट से एक माह पहले भागी बाघिन को अब तक दो जिले के प्रशिक्षित वनकर्मी नहीं पकड़ पाए हैं। बाघिन की तलाश में दो हाथी भी वनकर्मियों की मदद के लिए दिन रात पाठा के जंगलों में डेरा डाले हैं। बाघिन के गले में पड़े ट्रांसमिशन से उसकी लोकेशन कभी धारकुंडी, कैलहा, देवांगना, अनुसुइया, खोह व मारकुंडी के जंगलों में मिलती रही है। उसी ट्रांसमिशन की लोकेशन से वनकर्मियों को मंगलवार की शाम बाघिन की लोकेशन मारकुंडी के जंगल में मिली। टीम उसकी तलाश में थी।
इसी बीच वन विभाग चित्रकूट के रेंजर नरेंद्र सिंह अपने कर्मचारियों के साथ वहां से गुजरे तो बाघिन का उनसे सामना हुआ। टीम ने मोबाइल से बाघिन की फोटो खींची। मगर पकड़ नहीं सके, क्योंकि टीम के पास बाघिन को पकड़ने का कोई यंत्र नहीं था। टीम ने तत्काल दूसरी टीम से संपर्क किया। जब तक दूसरी टीम वहां पहुंचती बाघिन जंगल में घुस गई। डीएफओ बीके मिश्रा, रेंजर नरेंद्र सिंह ने दावा किया कि यह वहीं बाघिन है जो पन्ना से भागकर आई है। यह प्रजाति इस क्षेत्र में नहीं है। उधर पन्ना टाइगर्स प्रोजेक्ट के प्रतिनिधि राजेश दीक्षित ने भी फोटो देखकर बताया कि यह वही बाघिन है।