फोटो 19सीकेटीपी 02 हल्दी-धोबहरा नाला, इसी पर बनाया जाएगा रपटा पल। संवाद
चित्रकूट/सरैंया। जिले के मानिकपुर तहसील क्षेत्र में माराचंद्रा, धोबहरा और शिवलिहा समेत आसपास के गांवों के लोगों को अब जान जोखिम में डालकर नदी-नाले पार नहीं करने पड़ेंगे। यहां लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से तीन रपटा पुलों का निर्माण किया जाएगा। इन पुलों से करीब चार हजार ग्रामीण सीधे लाभान्वित होंगे और उन्हें बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी।
मानिकपुर और माराचंद्रा क्षेत्र विंध्य पर्वत श्रृंखला की तराई में स्थित है। बरसात के मौसम में पहाड़ी नालों और नदियों के कारण आवागमन बाधित हो जाता था। इससे लोगों को काफी परेशानी होती थी। ग्रामीण लंबे समय से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से पुल बनाने की मांग कर रहे थे। जिला प्रशासन ने इस मांग पर लघु सिंचाई विभाग को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे।
विभाग ने हल्दी-धोबहरा नाला पर तीन रपटा पुल और एप्रोच पुल निर्माण का खाका तैयार किया है। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एसडी मिश्रा ने इस परियोजना की जानकारी दी। सभी रपटा पुलों की चौड़ाई पांच मीटर रहेगी। इन पुलों से ग्राम पंचायत माराचंद्रा के गांवों का रास्ता सुगम होगा। बरसात में होने वाली आवागमन की बाधाएं दूर होंगी।
पुलों का विवरण
सहायक अभियंता एसडी मिश्रा के अनुसार, मानिकपुर तहसील क्षेत्र के माराचंद्रा प्रथम में 42 मीटर लंबा रपटा पुल और 60 मीटर एप्रोच सड़क बनेगी। इस पर 89.23 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। माराचंद्रा द्वितीय में 28 मीटर लंबा रपटा और 60 मीटर एप्रोच सड़क का निर्माण होगा। इस पर 69.10 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, शिवलिहा में 45 मीटर लंबा रपटा पुल और 30 मीटर एप्रोच सड़क निर्मित होगी। इस पर 86.48 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। जिले के मानिकपुर और पाठा क्षेत्र में कई ऐसे गांव हैं, जहां सड़क नहीं है। हाल ही में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने क्षेत्रीय विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी के साथ बाइक से इन दुर्गम गांवों तक पहुंचे थे। ग्रामीणों ने बातचीत में उनसे अपनी आवागमन संबंधी समस्या साझा की थी।