चित्रकूट। जिला अस्पताल में अभी तक किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई है। गंभीर हालत में प्रसूताएं रेफर हो रही हैं। जो किन्हीं कारणों से दूसरे अस्पताल नहीं जा पा रहीं, वे यहीं पर जिंदगी को दांव पर लगाकर इलाज करवा रही हैं।
अपर निदेशक स्वास्थ्य ने चित्रकूट के सीएमओ को पत्र लिखकर वहां की दो सीएचसी में तैनात दो महिला डॉक्टरों की सेवाएं लेने के आदेश दिए थे। इस आदेश को तीन दिन हो गए। अभी तक इनकी ड्यूटी तय नहीं हो सकी है। चिट्ठी पर चिट्ठियां चल रही हैं।
सब कुछ इतने आराम से रहा है मानो जननियों की सुरक्षा की किसी को परवाह ही नहीं। कुल मिलाकर जिला अस्पताल अपने ढर्रे पर चल रहा है। किसी की मौत से यहां व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद करना बेमानी है। सीएमओ, डीएम और स्थानीय विधायक को मानो यहां से कोई लेना देना नहीं। होता तो कुछ बदलता हुआ दिखता। संसाधनों और डॉक्टरों के अभाव में कोई मरता है तो मरे।
यही वजह है कि प्रसूता रोशनी मिश्रा की मौत के बाद भी सब कुछ जस का तस है। घटना को आठ दिन हो गए। अस्पताल में दिन और रात के समय गर्भवतियों और प्रसूताओं की देखभाल के लिए कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं किया जा सका।
डॉ. ऊषा लौटीं, लेकिन रात में ड्यूटी नहीं
जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत के सात दिन बाद आखिरकार अवकाश पर चल रहीं डा. ऊषा ड्यूटी पर लौट आईं। उन्होंने दिन में ओपीडी की, लेकिन रात में ड्यूटी नहीं लगी है।
आदेश की कॉपी सीएमएस और सीएचसी प्रभारी को भेज दी है। कह भी दिया है सभी को। उम्मीद है कि सोमवार तक कुछ तय हो पाए। -डॉ. भूपेश द्विवेदी, सीएमओ
दो महिला चिकित्सक डा. मोनिका गुप्ता और डा. स्वाती पाठक की तैनाती का आदेश मिला है। अब मानिकपुर व मऊ सीएचसी के प्रभारी इन दोनाें डाक्टरों का अपने यहां का ड्यूटी चार्ट भेजें तो उसी हिसाब से इनकी जिला अस्पताल में ड्यूटी लगाई जाएगी। डॉ. राजेश खरे, सीएमएस
दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो विधानसभा में उठाएंगे मामला
चित्रकूट। सपा के सदर विधायक अनिल प्रधान ने कहा कि जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत की घटना घोर लापरवाही है। वह पहले ही दिन मौके पर पहुंचे थे और एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई कराने के लिए सीएमओ और सीएमएस से कहा था। इसकी अवधि पूरी हो गई है। सोमवार को जिला अस्पताल जाकर अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी लेंगे। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई न हुई तो मामले को विधानसभा में उठाएंगे। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर कराने के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं।