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यह लड़ाई मेरी नहीं पांच करोड़ बुंदेलखंडियों की है : राजा बुंदेला

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चित्रकूट। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर बुंदेलखंड संयुक्त मोर्चा की गांव-गांव, पांव-पांव जनजागरण यात्रा अपने दूसरे दिन चित्रकूट पहुंची। शांति देवी इंटर कॉलेज में आयोजित गोष्ठी में मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा बुंदेला अपने संबोधन के बीच भावुक हो गए। उन्होंने पांच करोड़ बुंदेलखंडियों के अधिकारों के लिए विचार क्रांत का आह्वान किया। बुंदेला ने कहा कि यह लड़ाई उनकी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पांच करोड़ बुंदेलखंडियों की है। उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों के लिए जागने और संघर्ष करने का आह्वान किया।
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बुंदेला ने जोर देकर कहा कि अब केवल आंदोलन का नहीं, बल्कि विचार क्रांति का समय है, क्योंकि इतिहास में बड़े परिवर्तन विचारों की शक्ति से ही संभव हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बुंदेलखंड के लोग संगठित नहीं हुए, तो क्षेत्र की उपेक्षा जारी रहेगी। बुंदेला ने बुंदेलखंड की ऐतिहासिक पहचान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 12 मार्च 1948 को बुंदेलखंड राज्य का गठन हुआ था, जिसके प्रथम मुख्यमंत्री कामता प्रसाद सक्सेना थे। हालांकि, एक नवंबर 1956 को यह राज्य उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विभाजित हो गया।

यात्रा के दौरान शांति देवी इंटर कॉलेज के प्रबंधक सुनील पटेल ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। नांदी स्थित हनुमत इंटर कॉलेज में भी गोष्ठी हुई, जहां युवाओं से विचार क्रांति का नेतृत्व करने का आह्वान किया गया। प्रधानाचार्य चंद्रमणि त्रिपाठी ने भी अपने विचार रखे। अरछा बरेठी गांव में समाजसेवी शंकर यादव द्वारा आयोजित गोष्ठी में पृथक बुंदेलखंड राज्य की आवश्यकता पर चर्चा हुई। समाजसेवी प्रभाकर सिंह ने शंकर यादव के साथ यात्रा का स्वागत किया। इस जनजागरण यात्रा में मोर्चा के संयोजक एवं पूर्व विधायक दिनेश प्रसाद मिश्र, बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह सहित जयराम सिंह, प्रताप सिंह बुंदेला, राजन धमेरिया, आश्रय सिंह, पुष्पेंद्र चौहान, कालूराम प्रजापति शामिल रहे।
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