दो सौ बेड वाले 88 करोड़ की लागत से बन रहे अस्पताल का निरीक्षण शुक्रवार जिलाधिकारी ने किया। कागज पर दिखाया गया काम हकीकत में नजर नहीं आया। फिनिशिंग वायरिंग व सीलिंग का काम बेहद खराब मिलने पर निर्माण कराने वाली एजेंसी के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
जिले के अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह सब पूरा काम होने में कितना समय लगेगा इसका आंकलन कर जल्द रिपोर्ट दें। निर्माण कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि जो पहले से स्वीकृत नक्शा है उसमें बदलाव संभव नहीं है।
जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर अस्पताल के मेन बिल्डिंग के प्रथम ,सेकेंड फ्लोर में बने डाक्टरर्स रुम, ओटी, नर्स रुम, नर्स काउंटर व आवासीय परिसर आदि का निरीक्षण किया। उन्हाेंने राइट्स कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह अस्पताल लगभग 88 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन हो रहा है।
इसमें 95 प्रतिशत कार्य का होना मासिक व्यय विवरण में दर्शाया गया है जिसके निरीक्षण में काफी कार्य शेष है। जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग अरविंद कुमार व परियोजना प्रबंधक राजकीय निर्माण निगम एके गुप्ता को निर्देश दिए कि फ्लोर वाइज स्टीमेट के अनुसार मटेरियल की गुणवत्ता आदि की सघन जांच कराई जाए।
जिसमें बीम, फल सीलिंग, टाइल्स, ग्रिल, सीसे, जिप्सम आदि का मानक देखा जाए और उसी के आधार पर यह देखें कि यह कार्य कब तक पूर्ण कर सकते हैं इसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।
जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता विद्युत हरिबरन सिंह को निर्देश दिए कि विद्युत फिटिंग में विद्युत वायर, स्विच, एमसीबी आदि का निरीक्षण कर यह देखें कि स्टीमेट के अनुसार इसके द्वारा उसी कंपनी का लगाया गया है कि नहीं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह शासन की महत्वपूर्ण योजना है इसे जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। अधिकारियों ने बताया कि जो पूर्व में नक्शा स्वीकृत किया गया है उसी के अनुसार कार्य कराया गया है हमारी कंपनी इसमें कोई फेर बदल नहीं कर सकती है।
इस मौके पर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राजेंद्र सिंह, उप जिलाधिकारी इंदुप्रकाश सहित संबंधित अधिकारी व निर्माण एजेंसी के अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे।