चित्रकूट। दो से अधिक बच्चों के माता-पिता जिला पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। पंचायत चुनाव को लेकर सरकार के इस प्रस्ताव पर राजनीतिक हलकों से लेकर आमजनों में बहस छिड़ी है। चर्चाओं का बाजार गर्म है।
जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर पूर्व अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्यों का मानना है कि जो भी फैसला हो वो प्रदेश व चुनाव को पारदर्शी बनाने में हितकर हो, तभी स्वीकार्य है। ज्यादातर सदस्यों ने एक सुर में कहा कि जनहित को देखते हुए यह व्यवस्था सभी जनप्रतिनिधियों के चुनाव में लागू होनी चाहिए। लोगों ने इस बेहतर पहल बताए हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिहाज से यह ठीक है, साथ ही संदेह भी जताया कि सरकार अपने ही सुझाव को मूर्तरूप नहीं पहना पाएगी। साथ ही कई सदस्यों ने प्रत्याशियों की शैक्षिक योग्यता भी तय किए जाने पर जोर दिया।
जिला पंचायत सदस्य सिद्धार्थ पांडेय ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए यह बेहतर पहल है, लेकिन सरकार की नियत भी साफ होनी चाहिए। उन्हें विश्ववास नहीं है कि यह योजना लागू की जाएगी।
जिला पंचायत सदस्य अनिल प्रधान ने कहा कि पंचायत चुनाव लड़ने के इस प्रस्ताव के साथ प्रत्याशी के शिक्षित होने लिए कानून पास करना चाहिए। विधायक व सांसद के चुनाव में भी इस कानून को लागू किया जाए।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवशंकर सिंह यादव ने कहा कि सरकार की नीति पर संदेह है पर यह विचार अच्छा है। इसे लागू करने के पूर्व सभी दलों के विशेषज्ञों से राय मशविरा भी लिया जाना चाहिए।
जिला पंचायत अध्यक्ष मैना देवी ने कहा कि जनता के हित में जो भी कानून लाया जा रहा है वह सोच समझ कर ही लागू किया जाए ताकि इसका विरोध न हो। सर्वहित में नियम बनना चाहिए।
जिला पंचायत सदस्य पंकज यादव ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए जो कदम उठाए जा रहे है वह जनहिते के लिए बेहतर प्रयास हैं, लेकिन यह व्यवस्था सभी जनप्रतिनिधियों के चुनाव में भी लागू होनी चाहिए।
जिला पंचायत सदस्य अभिषेक निषाद ने कहा कि निश्चित रूप से दो से अधिक जिनके बच्चे होने पर प्रत्याशी के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के जिस सुझाव पर सरकार विचार कर रही यह बेहतर पहल है।