संत मोरारी बापू ने पूर्व प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू की किताब डिस्कवरी आफ इंडिया के अंशों को सुनाकर बताया कि सत्य अद्भूत चरित्र है रामायण व महाभारत की कथाएं इसका जीवंत उदाहरण हैं। तुलसी ने दुनिया को रामचरित मानस देकर अभय दिया है।
बुधवार को आंधी पानी के कारण उद्यमिता विद्यापीठ परिसर की जगह गुरुवार से रामायणमेला परिसर सीतापुर में कथा शुरू हुई। उन्होंने कहा कि चित्रकूट रस की भूमि है। हम यहां से रस लेकर जायें। मानस के दर्शन में लिखाहै कि दो प्रकार के वटवृक्षों के नीचे ही रामकथा होना चाहिये। तुलसी ने कहा कि वट माने विश्वास।
जनक का प्रेम निष्काम प्रेम है। दशरथ जी की भक्ति सकाम है। यत्न के द्वारा उन्होंने राम को पाने की इच्छा की। दाम्पत्य जीवन की घटना पर उन्होंने कहा कि पति पत्नी को प्रेम दे और पत्नी पति को आदर दे फिर दोनों हरि की भक्ति में लीन हो जाये तो निश्चित रूप से दांपत्य जीवन सुखमय हो जायेगा।
मोरारी बापू ने भीषण आंधी के कहर पर कहा कि कथा के कुछ नियम होते है जिस पक्ष मेंकथा प्रारंभ होती है उसी पक्ष में खत्म होती है। आज यह रिकार्ड इस कथामें हुआ कि आधी कथा मप्र में हुई और आधी उप्र में हो रही है। एक विशेष घटना जो यहां हुई उसका भी आनंद लिया जाये। भगवान भरतरामजी से मिलने उप्र से मप्र गये और मेरी पोथी श्रीराम से मिलने के लिये मप्र से उप्र गई।