चित्रकूट। पुलिस पर हमले के दूसरे दिन ओरा ममसी गांव में सन्नाटा छाया रहा। गुरुवार को दो बार पुलिस की टीमें वहां पहुंची। वहां मौजूद इक्का-दुक्का लोगों से बुधवार को घटना के दौरान मौजूद लोगों के बारे में जानकारी ली। उधर, बुधवार को पकड़े गए नौ आरोपियों को जेल भेज दिया है। साथ ही दावा किया कि दो दिन के अंदर अन्य आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि घटना के बाद दूसरे दिन गांव के लोग नहाने या कपड़ा धोने तक नहीं गए। उन्हें डर है कि कहीं किसी मुसीबत में न फंस जाएं।
पहाड़ी थाना क्षेत्र के ग्रामीण बताते हैं की ममसी खुर्द घाट से बालू का अवैध ढुलान बैलगाड़ी और ई-रिक्शा से रात-दिन किया जाता है। जब कोई अधिकारी ममसी घाट की ओर जाता है तो बालू माफियाओं को सूचना कुछ युवकों द्वारा पहले ही दे दी जाती है।
इस कारण बैलगाड़ी और ई-रिक्शों को मौके से हटा लिया जाता है। कभी कभार कोई बैलगाड़ी घाट के पास किसी अधिकारी को मिल जाती है तो ये लोग यह कहकर छुड़ा लेते हैं कि शासन से मिले शौचालय या आवास बनाने के लिये बालू ले जा रहे हैं।
ममसी ओरा गांव के आसपास के लोगों का कहना है कि बालू से अच्छा कोई व्यापार नहीं है। इस गोरखधंधे से मोटी रकम आती है। इस कारण कुछ लोगों ने बालू के अवैध खनन को पेशा बना लिया है। अवैध खनन करने वाले कभी पकड़ लिए जाते हैं तो घर बनाने के लिए बालू की जरूरत का बहाना बनाकर जान बचाते हैं।
ये लोग घर के पास बालू डंप कर बैलगाड़ी और ई-रिक्शा से महंगे दामों पर बेचते हैं। बताया जाता है कि एक बैलगाड़ी बालू 500 से 700 के बीच बिकती है। एक ई-रिक्शा बालू 300 से 400 रुपये में बेची जाती है। एक परिवार हर दिन पांच से 10 बैलगाड़ी बालू लाता है। नदी से एकत्र बालू को घरों से ट्रैक्टरों के माध्यम से बेची जाती है। जिसमें लगभग 3000 से 4000 मिल जाते हैं। आसपास के कई गांव के लोग बालू के अवैध खनन में संलिप्त हैं।