चित्रकूट। एक दो नहीं 40 साल तक घरों में दूध बेचकर चंद्रपाल सिंह यादव ने आज जो मुकाम हासिल किया है उसके लिये उनके पुत्र व पुत्रियां सोचकर भी भावुक हो जातीं हैं। कच्चा घर, दो बीघा जमीन और दो मवेशी ही इस परिवार का आधार था। लेकिन आज इस दूधिये किसान पिता के पास चार ट्रक दो प्लाट व 32 बीघे भूमि है। परिवार खुशहाल है। एक साल पहले उनकी पत्नी रानीदेवी के निधन होने पर वह खुद को असहाय महसूस करते हैं लेकिन अपने बच्चों को आगे बढ़ाने में हौसला आफजाई करते हैं।
शिवरामपुर क्षेत्र के गांव कल्ला निवासी चंद्रपाल सिंह यादव के संघर्ष की कहानी 1970 से शुरू होती है। बचपन से ही घर परिवार चलाने के लिए दूध बेचने का काम करते थे। खेती से महज घर के खाने भर को अनाज होता था। शादी के बाद भी उन्होेंने यह काम जारी रखा। तीन पुत्र तोमर सिंह, लाखन सिंह व लाल सिंह के अलावा तीन पुत्री गायत्री, ललिता व मंजू का लालन पालन और शिक्षित कराने का काम निरंतर जारी रखा। उनके हर बच्चे ने इंटर और इससे आगे की पढ़ाई की है और उनके काम में मदद भी करते हैं। तीनों बेटियों की शादी सिर्फ दूध बेच कर अच्छे घरों में की है।
बताया कि फादर्स-डे तो उनके बच्चों को देखकर ही पता चलता है सबको हंसते खेलते देख सब गम भूल जाता है। उनके पुत्र बी फार्मा कर चुके लाखन सिंह बताते हैं कि पिता के संघर्ष को हर दिन हर घड़ी बेहद नजदीक से परिवार ने देखा है उन्होंने बच्चों की इच्छा को पूरी करने की कोशिश की। जिसका नतीजा है कि आज भी उनका संयुक्त परिवार है। 2020 में मां रानीदेवी के निधन के बाद पिता चंद्रपाल सिंह यादव का हौसला टूटा लेकिन अब 63 वर्ष की उम्र में भी वह हर काम में बच्चों का हौसला बढ़ाकर घरेलू काम में मदद करते हैं।