चित्रकूट। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में दिव्यांगों के लिए अलग से शौचालय बनाने की गति बहुत ही धीमी है। विभाग की उदासीनता के चलते अभी मात्र 38 फीसदी स्कूलों में ही दिव्यांग शौचालय बन पाए हैं। इससे दिव्यांग बच्चों को परेशानी होती है। वहीं विभाग बजट न आने से निर्माण न होने की बात कहता है। जबकि अन्य छात्र-छात्राओं के शौचालयों का निर्माण करीब 98 प्रतिशत से अधिक हैं।
जनपद में कुल 1262 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें पानी की व्यवस्था, छात्र व छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय, टाइल्स, दिव्यांग शौचालय, हाथ धोने के लिए बेसिन, ब्लैक बोर्ड, किचेन, रैंप व रेलिंग, बिजली कनेक्शन, फर्नीचर, बाउंड्री वाल सहित 19 प्रकार के कार्य कराए जाते हैं। इनमें सबसे अधिक खराब स्थिति दिव्यांग शौचालय की है। अभी तक केवल 482 स्कूलों में ही शौचालयों का निर्माण हो सका है। वहीं 780 स्कूलों में केवल कार्ययोजना बनाई जा सकी है।
एक दिव्यांग शौचालय बनाने में करीब एक लाख 70 हजार रुपये खर्च होता है। दिव्यांग शौचालय का निर्माण ग्राम पंचायत से कराया जाता है। 780 स्कूलों वाली ग्राम पंचायतों में धनराशि न होने का रोना ग्राम प्रधान रो रहे हैं। वह शासन से धनराशि आने के बाद निर्माण की बात कहते हैं।
स्कूलों में फर्नीचर लगाने में भी विभाग फिसड्डी है। अभी तक 442 स्कूलों में फर्नीचर नहीं लगाए जा सके हैं। 820 स्कूलों में खनिज सहित अन्य विभागों से मिली धनराशि से फर्नीचर लग गए हैं। जो कुल करीब 65 प्रतिशत है।
बीएसए बीके शर्मा ने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों में दिव्यांग शौचालय बनाने के लिए धनराशि शासन से आ गई है। वहां पर निर्माण पूरा हो चुका है। अन्य स्कूलों में शौचालय बनाने की कार्ययोजना ग्राम पंचायतों ने भेजी है। धनराशि आते ही निर्माण कराया जाएगा।