जब पेट की बात आती है तो मानवाधिकार किनारे हो जाता है। किसी भी शादी समारोह में बडे़-बडे़ प्रबुद्ध, सरकारी अधिकारी व उद्योगपति शामिल होते है, लेकिन किसी का भी इन नाबालिगों पर ध्यान नहीं है।
ये सब पेट की खातिर ही रोड लाइट उठाकर दूसरों को रोशनी दिखा रहे हैं। लेकिन इनके जीवन में कब उजाला आएगा इसका पता नहीं है। यह नजारा बुधवार की रात मुख्यालय के शंकर बाजार में देखने को मिला।
सर्वोदय सेवा संस्थान के सचिव अभिमन्यु सिंह ने कहा कि मानवाधिकार दिवस पर औपचारिकताएं की जा रही हैं। जिला व ग्राम पंचायत स्तर बनी समितियां महज कागजी खानापूर्ति करती हैं। अधिकारी भी कभी बाल श्रम व मानवाधिकारों के हनन की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई नहीं करता।