फोटो- 12- चित्रकूट में रामायण मेले में मंच पर ढेडिहा डांस की प्रस्तुति करतीं प्रयागराज के कलाकार।
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चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेले में रामचरितमानस व विभिन्न रामायणों के शोधपरक विभिन्न भाषा के बौद्धिक व्याख्यानों, ख्यातिलब्ध कथावाचकों के पारंपरिक प्रवचन, रामलीला, रासलीला तथा भगवान श्रीराम एवं कृष्ण काव्यों के आधार पर जैसे शास्त्रीय नृत्यों, रामकथा प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। विद्वजनों का कहना है कि रामचरित मानस की एक चौपाई भी इंसान जीवन में धारण कर आत्मसात करे तो उसका कल्याण होगा। शिक्षा व मर्यादा के साथ भारतीय संस्कृति का आधार रामचरित मानस है। डा. तीरथदीन पटेल ने चित्रकूट की पावन भूमि का वर्णनल एक बुंदेली गीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। चित्रकूट की माटी जिसमें राम रमे हैं, जनम दइयो विधाता चित्रकूट में। रामभरोसे तिवारी ने, प्रेम से प्रकट होई मैं जाना की बहुत ही सुंदर व्याख्या प्रस्तुत की।
रविवार को छिंदवाडा के सीताराम शरण रामायणी ने श्रीराम और रामायण के बारे में कहा कि मानस की चौपाईयां मंत्र हैं। श्रीरामचरितमानस आदर्श जीवन के लिये आचार संहिता के समान है। मनुष्य यदि मानस की एक चौपाई को भी जीवन में उतार ले तो उसका जीवन भवसागर पार हो जाएगा। दूसरों की भलाई के समान कोई दूसरा धर्म नहीं है और दूसरों को पीड़ा पहुंचाने के समान कोई अधर्म नहीं है। छिंदवाड़ा की वसुंधरा रामायणी ने कहा कि जीवन में और समाज की प्रगति में नारी की विशेष भूमिका है। झांसी की मानस मंदाकिनी ने कहा कि प्रभु श्रीराम से लगन लग जाने पर मानो जीवन का सुधार हो जाता है तो श्रीराम के प्रति समर्पित होकर जीवन जीने की आवश्यकता है। सभा का संचालन करते हुए प्रयागराज के डा. सीताराम सिंह ‘विश्वबंधु’ ने कहा कि रामचरितमानस से शिक्षा ग्रहण कर मर्यादा पूर्ण जीवन जीना चाहिये। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम है और वर्तमान समय मर्यादा का हनन हो रहा है। ग्वालियर केे श्रीलाल पचौरी ने रामकथा के माध्यम से बेटियों और बहनों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
चेन्नई के प्रो. डा. अशोक कुमार द्विवेदी, डा. छेदीलाल कांस्य कार औरंगाबाद व डा. सभापति मिश्र ने राम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राम जितने अपने युग त्रेता में प्रांसगिक थे उतने ही आज भी प्रासंगिक हैं। इसी दौरान डबरा के श्रीलाल पचौरी की पुस्तक ‘अचूक अमोघ शक्ति’ का विमोचन डा. सभापति मिश्र व तिरुपति स्वामी ने किया। डा. उदयशंकर दुबे ,डा. चन्द्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने कहा कि श्रीराम की कथा अनंत है।
प्रदर्शनी में उमड़ रही भीड़
चित्रकूट। रामायण मेले के दौरान ही विशाल प्रदर्शनी व झूले लगे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने आने वाले हजारों लोग सुबह शाम इस प्रदर्शनी में भी खूब खरीददारी कर रहे हैं। खासकर महिलाओं व बच्चों की संख्या बहुत है।