चित्रकूट। आस्था की नगरी चित्रकूट के रामघाट का अस्तित्व जिस सरयू नदी की धारा से जुड़ा था, वह अब सरकारी नक्शे से ही गायब हो चुकी है।
नदी की जमीन पर कब्जे होने पर प्रशासन सालों आंखें मूंदे रहा। इस बार बाढ़ ने जब रामघाट को अपनी आगोश में ले लिया तो प्रशासन की नींद टूटी। अब जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की पहल पर गायब हो चुकी सरयू को सैटेलाइट और रोवर तकनीक से खोजने का वैज्ञानिक सर्वे शुरू हुआ है।
राजस्व अभिलेखों में सरयू आज भी एक बड़ी नदी के रूप में दर्ज है, लेकिन मौके पर उसकी एक भी बूंद नहीं बची। स्थानीय लोगों के मुताबिक सरयू के दर्जनों छोटे-बड़े जलस्रोतों और नालों को धीरे-धीरे पाट दिया गया। कहीं मकान बना दिए गए तो कहीं पक्के अतिक्रमण खड़े कर दिए गए।
ऐसे में नदी का प्राकृतिक रास्ता रोकने का सीधा असर मंदाकिनी पर पड़ा। सरयू का पानी मंदाकिनी में जाता था। लेकिन यह रास्ता बंद होने से अब मंदाकिनी का अस्तित्व भी खतरे में है।
पिछले दिनों हुई तेज बारिश के बाद रामघाट में अचानक बाढ़ आ गई। वजह साफ थी कि पानी के निकास का रास्ता पहले ही अतिक्रमण में बंद हो चुका था। नदी का पानी न तो आगे बढ़ पाया और न ही जमीन में समा पाया, ऐसे में बाढ़ का पानी सीधे घाट और दुकानों में घुस गया।
जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व, सिंचाई और जल निगम की संयुक्त टीम गठित की है। यह टीम रोवर तकनीक और सैटेलाइट इमेज के जरिए सरयू की पुरानी धारा का सीमांकन कर रही है। पुराने नक्शे और सैटेलाइट तस्वीरों से मिलान करके देखा जा रहा है कि नदी कहां-कहां तक बहती थी और इसके कितने क्षेत्र पर अतिक्रमण है।
फिलहाल रामघाट के लोगों को उम्मीद है कि कागजों में गायब हो चुकी उनकी सरयू फिर से धरातल पर लौटेगी। वहीं चर्चा यह भी है कि क्या प्रशासन अतिक्रमण करने वाले बड़े माफिया पर हाथ डाल पाएगा या फिर यह सर्वे भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
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वर्जन
सरयू के पुनर्जीवन से मंदाकिनी को मिलेगा नया जीवन
सरयू नदी का सीमांकन कराया जा रहा है। रोवर तकनीक व सैटेलाइट के जरिए नदी का सर्वे हो रहा है। रिपोर्ट आने के बाद सरयू के जलस्रोतों को पुनर्जीवित कर मंदाकिनी को भी नया जीवन देने की तैयारी है।
- पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी