नई बाजार में गोसेवा करते समाजसेवी रमेश धतुरहा
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चित्रकूट। पूरे देश में जहां गोरक्षा के नाम पर कार्यक्रम और बहस चल रही है, जिसमें बुंदेलखंड की अन्ना मवेशी समस्या प्रमुख है। कोई गाय की रक्षा करने को गोशाला खोलने और कोई कानून बनाने की बात कर रहा है लेकिन बुंदेलख्ंाड में सड़कों पर फिरती गायों की हालत में कोई सुधार नहीं दिखता।
ऐसे में शहर के समाजसेवी की आधा दर्जन युवकों की एक टोली ऐसी है जो अपने क्षेत्र में आने वाली सभी अन्ना गाय को सुबह से शाम तक पानी, भोजन के अलावा दवाओं का भी इंतजाम निजी तरीके से कर रहे हैं। उनके प्रयास के सामने सरकारी प्रयास फीके नजर आते हैं।
शहर के नई बाजार चौराहे पर ओवरब्रिज के नीचे रमेश धतुरहा गोसेवा का काम तो लगभग दस साल से कर रहे हैं। वैसे जिले में कई गोशाला हैं और कई अधिकारी इस दिशा में अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन स्वप्रयास और स्वप्रेरणा से शहर के रमेश धतुरहा के प्रयास को सभी सराहते हैं।
स्थानीय राहुल गुप्ता, धर्मचंद्र व गोलू का कहना है कि धतुरहा की टीम में दिनेश कुमार, रंजीत पटेल और कन्नू गुप्ता मिलकर सुबह छह बजे से आठ बजे तक चौराहे पर गोसेवा करते हैं। सभी को पानी पिलाकर होटलों में बची पूड़ी सब्जी लाकर खिलाई जाती है।
यह क्रम रात को भी चलता है। ओवरब्रिज के नीचे दो टब रखाकर पानी का इंतजाम किया गया है। इतना ही नहीं जब इस मोहल्ले में कोई गाय बीमार होती है तो उसका इलाज भी मिलकर करते हैं। समाजसेवी रमेश ने बताया कि जब बीमार गाय का स्वास्थ्य ठीक नहीं होता तो पशु अस्पताल से डाक्टर बुलाए जाते हैं।