भूसे की बढ़ती कीमतों ने पशुपालकों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि यहां भूसा आलू से भी महंगा बिक रहा है। जनपद में आलू की कीमत सात से आठ सौ रुपये क्विंटल है, जबकि भूसा 1000 से 1200 क्विंटल बिक रहा है। यही वजह है गरीब पशुपालक अपने मवेशियों को खुला छोड़ रहे है।
सूख के कारण इस वर्ष हरे चारे की फसल बरसीम, जई, चरी आदि नहीं हो पाई हैं। यही कारण है कि भूसे की मांग बढ़ गई है। इससे भूसा 1000 से लेकर 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जबकि आलू करीब चार सौ रुपये प्रति क्विंटल सस्ता है। भूसे की किल्लत और महंगाई के कारण लोगों को पशु पालने में दिक्कत हो रही है।
दूध का व्यापार करने वाले रौली कल्यानपुर निवासी रामजी तिवारी का कहना है कि भूसे के बढ़ते दाम किसानों को तबाह कर रहा है। पहले जो भूसा 150 रुपये क्विंटल आसानी से मिल जाता था, अब वहीं मुश्किल से मिल रहा है। काफी गुजारिश करने पर किसान 1000 रुपये क्विंटल दे रहा है। यही हाल रहा तो जानवर पालना मुश्किल हो जाएगा। सीतापुर गांव के लोक महराज का कहना है कि यदि गाय और भैंस आलू खातीं तो मै भूसा की जगह इनको आलू ही खिलाता। गांव में भूसा एक हजार रुपये क्विंटल है, जबकि आलू सात सौ में मिल रहा है।
सूखे के हालात को देखते हुए लघु सीमांत किसानों के पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था को शासन से एक करोड़ रुपये आए हैं। एडीएम महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि जिले में भूसा राहत शिविर खुलवाकर उनमें शासन से आई राशि से भूसा खरीद कर उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एनके गहलोत ने बताया कि जिले की तीनों तहसीलों में कुल 14 चारा केंद्र खुलवाए गए हैं, जिनमें लघु सीमांत किसान अपने पशुओं को ले जाकर चारा खिला सकते हैं।
कर्वी तहसील में कर्वी, पहाड़ी, चकौंध, इटखरी व घुरेटनपुर, मानिकपुर तहसील में मानिकपुर कस्बा, मारकुंडी व रूकमा बुजुर्ग में भूसा केंद्र खोला गया है। मऊ तहसील में मऊ, बरगढ़ व हन्ना बिनैका और राजापुर में बिहरंवा, हरदौली व बछरन में भूसा राहत केंद्र खोला गया है।