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संक्रमितों की जान पर आफत देख छोड़ दी थी अपनी फिक्र

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चित्रकूट। कोरोना महामारी के दौरान जहां लोग एक दूसरे को छूने से परहेज करते रहे वहीं डाक्टर्स का पेशा ऐसा रहा कि सबकुछ देखते हुए मरीज की बेहतर सेवा व दवा करना दायित्व रहा। जिले में कई डाक्टरों ने मिसाल कायम की है। जिसमें कुछेक उदाहरण ऐसे हैं जो कोरोना संक्रमित होते होते बचे इसके बाद भी अपने दायित्व को बखूबी निभाते रहे। जिले के कोविड अस्पताल में मरीज व तीमारदारों से इसे लेकर कई बार विवाद यहां तक की मारपीट भी डाक्टर्स व स्टाफ से हुई लेकिन यह सब विचलित नहीं हुए।
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जिला अस्पताल में तैनात डा. सत्य सिंह ने लगातार दो माह तक कोविड अस्पताल में इलाज किया। बताया कि इस दौरान तमाम तरह की मुश्किलें झेलीं पर मास्क व शील्ड लगाकर अपने काम में डटे रहे। कई बार मरीज व तीमारदार उत्तेजित होते रहे लेकिन वह शांतिपूर्ण तरीके से इलाज करते रहे जिसका नतीजा रहा कि 80 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को स्वस्थ करने में सफलता मिली। बीमार को स्वस्थ होकर घर जाते देख बेहद राहत मिली। कोरोना काल में सभी को कोरोना गाइडलाइन का पालन नियमित करना चाहिए अभी यह खतरा टला नहीं है।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. एचसी अग्रवाल कहते हैं कि कोरेाना काल का अनुभव जीवनपर्यंत काम आयेगा। बच्चों को इस काल में बचाने के लिए जीजान लगानी पड़ी। कोविड अस्पताल से लेकर जिला अस्पताल और एसएनसीयू में दो माह में नियमित काम करने के दौरान महसूस हुआ कि जिले में स्वास्थ्य के प्रति लोगों में अभी कम जागरुकता है। जब रोग बढ़ जाता है तब लोग विशेषज्ञ के पास आते हैं और कुछ कमी रहने पर दबाव बनाने लगते हैं। इन सबके बावजूद जिले में लोगों की इम्युनिटी पावर संतोषजनक है बस उसे नियमित करने की जरूरत है। कोविड काल में उन्होंने सबसे पहले डा. बी लाल के साथ टीका लगवाया था। एकाध बार लगा कि वह खुद संक्रमित हो गये लेकिन दवा खाकर बराबर काम करते रहे।
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कोविड काल में जब सरकारी व बडे़ अस्पताल के डाक्टरों ने मरीजों को छूते तक नहीं थे, सिर्फ फोन पर इलाज बताते थे उन परिस्थितियों में भी शहर के नामी डा. सुरेंद्र अग्रवाल अपने कर्तव्य से विचलित नहीं हुए। दिन रात हर मरीज की देखभाल कर दवा की। जिससे कोरोना काल में उनकेे अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ लगी रही। खुद एक माह बीमार रहे जिससे बाहर जिले में जाकर भर्ती हुए। लौटते ही सीनियर डाक्टरों के मना करने के बावजूद मरीजों व तीमारदारों की भीड़ व मजबूरी समझकर वह नियमित रूप से काम पर लौटे। उन्होंने सभी से टीकाकरण कराकर कोरोना से सावधान रहने को कहा है।
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