डाकू जियालाल के पकड़े जाने के बाद नागर गांव में बंद पड़ा उसका घर व पसरा सन्नाटा।
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पुलिस मुठभेड़ से बच निकले कुख्यात डाकू बबुली कोल गैंग की तलाश में दो पुलिस टीमें लगातार पाठा क्षेत्र के जंगल में सर्च अभियान चला रही है। फिलहाल बचे गैंग के सदस्यों का कुछ पता नहीं चल पा रहा है।
गौरतलब है कि मारकुंडी थानाक्षेत्र के किहुनिया जंगल में शनिवार को तड़के पुलिस टीम की साढ़े पांच लाख के इनामी डाकू बबुली कोल गैंग से मुठभेड़ हुई थी। जिसमें दोनों तरफ से लगभग डेढ़ घंटे तक ताबड़तोड़ गोलियां चलने के बाद पुलिस की गोली से घायल गैंग के शार्प शूटर को जिंदा पकड़ा गया था। गैंग सरगना समेत बाकी गैंग जंगल में भागने में सफल रहा था। रविवार को तड़के से लेकर शाम तक पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह, अपर एसपी बलवंत चौधरी, एंटी डकैती टीम प्रभारी सुजीत कुमार व मारकुंडी थाना प्रभारी साजिद खान ने अमरावती आश्रम के पीछे घने जंगल में सर्च अभियान चलाया। इसके बाद किंहुनिया जंगल और ददरीमाफी, लक्ष्मन पहाड़, डोडा, सोसायटी कोलान आदि जंगल में भी पुलिस टीम पहुंची। शाम को पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गैंग के बचे सदस्यों की तलाश की जा रही है।
पूरे गैंग का मामा के गांव में पसरा सन्नाटा
कुख्यात डाकू बबुली कोल गैंग के शार्प शूटर का पुलिस के हाथ लगना इस बचे गैंग के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। इसकी जानकारी होने के बाद से शार्पशूटर जियालाल कोल के गांव नागर में सन्नाटा पसरा है। उसके घर के दरवाजे पर ताला लटका है। पत्नी उमादेवी का कहीं अता पता नहीं चल सका है। यह जरूर बताया गया है कि उसके परिजनों ने चोरी से जियालाल से मिलने का प्रयास किया है। उसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
डाकू रागिया, बलखड़िया गैंग में रहे 25 हजार के इनामीे डाकू जियालाल को ज्यादातर गैंग के सदस्य मामा कहकर भी बुलाते थे। वह गैंग सरगना के दाहिने हाथ डाकू लवलेश कोल(एक लाख दस हजार काइनामी) का सगा मामा है। इसी रिश्ते से सरगना बबुली भी उसे मामा कहता है। शनिवार को उसके गोली लगने के बाद पकड़े जाने से गैंग को करारा झटका लगा है। जिसका सबूत यह था कि किहुंनिया जंगल में मुठभेड़ के दौरान उसके गोली लगने के बाद डकैतों ने पुलिस टीम पर आटोसेमी से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी।
डाकू जियालाल नागर गांव का निवासी है। गोली लगने व पुलिस के कब्जे में होने की जानकारी होते ही पूरे गांव में रविवार को सन्नाटा पसरा रहा। खासकर जियालाल के घर में ताला लटकता रहा। आसपास कोई भी सदस्य नजर नहीं आया। गांव के कुछ लोगों ने बताया कि उसकी पत्नी उमादेवी परेशान थी कि किसी तरह उससे मुलाकात हो जाए लेकिन पुलिस सुरक्षा के कारण वह अस्पताल में नहीं मिल पाई। उधर सूत्रों के अनुसार कई ग्रामीणों ने जिला अस्पताल में भारी पुलिस सुरक्षा के बीच इलाज करा रहे घायल डाकू से मिलने का प्रयास किया है।