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चित्रकूट: मानव जीवन को सुंदर बनाने के लिए सत्संग आवश्यक

Sun, 19 Feb 2023 11:22 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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मानव जीवन को सुंदर बनाने के लिए सत्संग आवश्यक
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- श्रीराम के चिंतन करने से परम आनंद मिलता
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला के स्वर्ण जयंती समारोह में विभिन्न प्रदेशों से विद्वान आए हैं। इन्होंने रामायण पर अपने व्याख्यान रखे। रामचरित मानस में ताडना शब्द को स्पष्ट करते हुए कहा कि ताडना शब्द का प्रयोग नारी के अर्थ में नारी के साथ प्रेम और प्रोत्साहन के अर्थ में है।
वाराणसी के आचार्य पं. रामेश्वर त्रिपाठी ने बताया कि मानव जीवन पाने का मुख्य उद्देश्य परमात्मा के चरणों में अनुराग प्राप्त करना होता है। मानव जीवन को सुंदर बनाने के लिए सत्संग अत्यधिक आवश्यक है। सत्संग के माध्यम से जब मन निर्मल हो जाएगा तभी परमात्मा के चरणों में अनुराग प्राप्त होगा। गोस्वामी तुलसीदास इस संबंध में रचना की है कि निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा। बांदा के डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित उर्फ ललित ने यह भी कहा कि ताडना शब्द को लेकर राजनीतिक क्षेत्र में जो तूफान खड़ा किया जा रहा है और रामचरित मानस को प्रतिबंधित करने की बात कही जा रही है वह नितांत जातियों का विभाजन करने की कुचेष्टा है।
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व्याख्यान सभा की अध्यक्षता करते हुए पंजाब पटियाला बाबा भूपिंदर सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम को अयोध्या का राज्याभिषेक होने वाला था। यह सुनकर भगवान श्रीराम को कोई हर्ष नहीं हुआ। बल्कि जब संदेश मिला कि वनगमन करना है, तो श्रीराम को किसी भी तरह का दुख नहीं हुआ। उन्होंने श्रीराम चित्रकूट पूर्णमासी की रात्रि पहुंचे थे। मुंबई से वीरेंद्र प्रसाद शास्त्री ने कहा प्रभु राम की छवि का अंत करण में उतारने व चिंतन करने से जीवन को परम आनंद बना देता है। सागर विश्व विद्यालय के प्रवक्ता डा. नौनिहाल गौतम ने कहा कि राम का सुमिरन और गायन संसार सागर से पार उतारने वाला है।
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ग्वालियर के डा. श्रीलाल पचौरी ने कहा कि विश्व में जितने भी तीर्थ हैं उन सभी में महत्वपूर्ण चित्रकूट है। इस चित्रकूट में सब दिन बसत प्रभु सिय लखन समेत इस पर विस्तृत चर्चा की। यहां सुरेंद्र सिंह डा. कृष्णमणि चतुर्वेदी, डा. संतोश अवस्थी, डा. हरि प्रसाद दुबे ने संबोधित किया।
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