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चित्रकूटः व्यवस्था से नाराज समितियों के सचिवों में आक्रोश

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चित्रकूट। खाद वितरण के दौरान सहकारी समितियों में किसानों की लंबी लाइन और हंगामे की घटनाओं को लेकर समितियों के सचिवों में आक्रोश है। शनिवार को शहर के कोआपरेटिव सोसायटी परिसर में साधन सहकारी समितियों के सचिवों ने बैठक की। इसमें चार सचिवों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराए जाने को लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठाए गए। आरोप लगाया कि जब विभाग की व्यवस्था ही सही नहीं है, तो सचिव दोषी कैसे हो सकते हैं।
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बैठक में साधन सहकारी समिति रामपुर के सचिव सोहन ने कहा कि विभाग द्वारा दी गई पॉश मशीन अक्सर खराब रहती है। इससे खाद वितरण नहीं हो पाता है। किसानों के दबाव में आकर वे लोग आधार नंबर रजिस्टर में नोटकर उन्हें खाद दे देते हैं। इससे मशीन में स्टाक नहीं घटता है। अधिकारी निरीक्षण के दौरान मशीन के स्टाक को ही सही मानते हैं। मशीन खराब होने पर अगर खाद वितरण रोक दो तो किसान हंगामा करने लगते हैं।
ऐसे में विभाग भी उनकी कोई मदद नहीं करता है। बस सचिव पर ही कानूनी कार्रवाई करा दी जाती है। हाल ही में चार सचिवों पर हुई कार्रवाई इसी का नतीजा है। अधिकारी खुद को बचने के लिए सचिवों पर एफआईआर करा देते हैं। इस मामले की जांच कराकर अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
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बैठक में तय हुआ कि पॉश मशीन खराब होने पर अधिकारी यदि सचिव पर कार्रवाई करते हैं तो इसके विरोध में सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला लिया जा सकता है। खाद को स्टाक के अनुसार किसानों में बांटने में सचिवों को कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने चारों सचिवों को जल्द काम पर लौटाने की मांग की है।
इस संबंध में सहकारी समिति के एआर नरेंद्र सिंह ने कहा कि मशीन खराब हो तो इंजीनियर के आने पर उसेे सही कराएं। स्टाक खत्म होने पर वितरण नहीं होता है और न ही सचिवों पर एकतरफा कार्रवाई की जाती है। जिला कृषि अधिकारी वसंत दुबे ने बताया कि पॉश मशीन से ही वितरण के आदेश हैं। मशीन खराब होने पर किसी भी दशा में खाद का वितरण न करें अन्यथा वितरण करने वाला ही जिम्मेदार माना जाएगा। जिन चार सचिवों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। वह खुद के निर्दोष होने का साक्ष्य अदालत को दें।
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