पूर्व मंत्री व पूर्व सांसद आरके सिंह पटेल ने अपने समर्थकों के साथ हाथी की सवारी छोड़कर कमल थाम लिया है। पूर्व सांसद के इस कदम का बुंदेलखंड की राजनीति पर प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। पहाड़ी ब्लाक के बालापुर निवासी रामकृपाल पटेल ने कालीन बुनाई के काम से व्यापार शुरू किया और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति भी किया। वर्ष 1990 में बसपा की सदस्यता लेने के बाद 1993 में कर्वी से चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा के भैरो प्रसाद से हार गए थे।
वर्ष1996 के बाद 2002 में बसपा से दोबारा विधायक बने तो सरकार में बाह्य सहायता आयातित एवं विज्ञान प्रौघौगिकी मंत्री का भी जिम्मा मिला। वह 2007 में बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और 2009 में सांसद बने। 2014 में सपा छोड़ फिर बसपा में वापसी की और सांसद के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे। अब 2017 में 16 जनवरी को लखनऊ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए हैं।