चित्रकूट। कोषागार घोटाले में 47 दिन से चल रही जांच में दूसरी बार रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह शुक्रवार को एसआईटी के समक्ष पेश हुए। बाद में टीम ने उनका आमना-सामना विभाग के तीनों अकाउंटेंट से भी कराया। इस दौरान चारों के चेहरे पर ठंडी में भी पसीने की बूंदे बार-बार आती रहीं। हर एक सवाल पर सभी अपनी सफाई दे रहे थे। खासकर 10विशेष खाते के संचालन के लिए जब एसआईटी ने कई तथ्य रखे तो विभागीय अधिकारी कर्मचारी एक-दूसरे पर ही घोटाले का ठीकरा फोड़ने लगे।
कोषागार घोटाले में एटीओ विकास सचान व एकाउंटेंट अशोक वर्मा और रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह का भी नाम है। एक एटीओ संदीप श्रीवास्तव की मृत्यु हो चुकी है। 47 दिनों की जांच में रिटायर्ड एटीओ को दूसरी बार एसआईटी ने बुलाया। जांच टीम ने शुक्रवार को उनके कार्यकाल के 30 फाइलों में हुए ऑनलाइन भुगतान, हर पटल के रिकाॅर्ड, डिजिटल हस्ताक्षर, भुगतान की राशि व पासवर्ड का विवरण सामने रखा।
विभाग के एकाउंटेंट योगेंद्र सिंह, राजेश व राजबहादुर को भी फाइलों के साथ बुलाया गया। चार घंटे तक चली पूछताछ में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अकाउंटेंट ने उनके अवकाश के दौरान फाइलें आगे बढ़ाईं। उनके पास उनका पासवर्ड व डिजिटल हस्ताक्षर पहले से था। जैसे ही उन्होंने यह आरोप लगाया तो तीनों अकाउंटेंट के चेहरे पर पसीना आ गया। तीनों एकाउंटेंट ने बताया कि यह गलत आरोप हैं। वह जब अवकाश पर होते थे तो उनके पटल से फाइल एटीओ आगे बढ़ाते थे। उनसे बड़े अधिकारी होने के नाते उनके डिजिटल हस्ताक्षर पहले से ही उनके पास रहते थे। उनके पटल का पासवर्ड भी उन्हें मालूम है।
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जल्द ही प्रथम जांच पूरी हो जाएगी। कई महत्वपूर्व जानकारी मिल चुकी है। चाहे रिटायर्ड एटीओ हों या फिर अन्य विभागीय अधिकारी कर्मचारी जो भी इस दायरे में आ रहा है उससे पूछताछ जारी है। दो बार रिटायर्ड एटीओ और कई बार विभागीय अन्य अधिकारी कर्मचारियों से पूछताछ हुई है।
- अरुण कुमार सिंह, एसपी
आज विकास व गौरेंद्र की जमानत पर सुनवाई
चित्रकूट। कोषागार घोटाला मामले में जेल में बंद एटीओ विकास सचान की जमानत पर छह दिसंबर को जिला जज की कोर्ट में सुनवाई होनी है। तीन दिन पूर्व इनके अधिवक्ता ने जमानत की याचिका डाली है। इसी प्रकार जेल में बंद बिचौलिए गौरेंद्र की भी जमानत पर शनिवार को सुनवाई होनी है। इस पर आरोप है कि अपनी मृत पेंशनर मांं के खाते समेत अलग एक खाता संचालित कर तीन करोड़ से अधिक का भुगतान कोषागार विभाग से मिला है।
पेंशनर व उनके परिजनों को लुभावने ऑफर से जाल में फंसाया
चित्रकूट। कोषागार घोटाला मामले में एसआईटी की जांच में सामने आया कि सन 2018 से 2025 के बीच में 450 बार में 93 पेंशनरों को 43.13 करोड़ का सात साल में किया भुगतान किया गया है। विभागीय अधिकारियों ने बेहद शातिर अंदाज में पहले मृत पेंशनरों के परिजनों को उनके खाते में मृ़त प्रमाण पत्र लगाने से रोककर इसके कई फायदे बताए। शुरु में एक साल तक यह प्रयोग इन शातिरों का सफल रहा तो फिर अन्य विभागीय अधिकारी भी इसमें शामिल हो गए। दो साल तक न पकड़े जाने पर बढाया दायरा और इस दौरान मृत प्रमाण पत्र लेकर आने वाले पेंशनरों के परिजनों को भी दिए लुभावने ऑफर देकर अलग खाते का संचालन कराना शुरु कर दिया। कई बार बिचौलिये भी इस बात को खुद बता चुके हैं कि नामजद अधिकारी व कर्मचारी ही उन्हें ऑफर करते थे और अपना कमीशन काटकर इन्हें भुगतान लाकर देते थे। (संवाद)