चित्रकूट के तरौंहा मोहल्ला निवासी दीनदयाल करवरिया किसान होते हुए भी देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता संग्राम में कूद पडे़ थे। स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने पर उनको छह माह की सजा भी हुई थी। उनके जज्बे की आज भी सराहना की जाती है।
वहीं उनके परिवार के सदस्य इस समय आर्थिक तंगहाली से गुजर रहे हैं। दीनदयाल करवरिया आजादी के बाद कांग्रेस सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी की उपाधि दी थी। उन्हीं से प्रेरणा लेकर तरौंहा के कई युवकों ने भी देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।
लेकिन आज स्वतंत्रता सेनानी दीनदयाल के परिवार के सदस्य आर्थिक स्थिति से गुजर रहे हैं। उनकी मौत के बाद पत्नी राजेश्वरी देवी को मिलने वाली पेंशन से घर चलता था, लेकिन उनकी भी मृत्यु हो गई है।
दो पुत्र शिवशंकर करवरिया व गणेश शंकर करवरिया हैं। इसमें गणेश मूकबधिर हैं और शिवशंकर खेती कर परिवार का पालन करते हैं। शिवशंकर के दो पुत्र जितेंद्र व अनिल हैं। खेती के सहारे ही किसी तरह उनका परिवार चल रहा है।