मंदाकिनी के सफेद पानी का रंग अब प्रदूषण के कारण लाल हो रहा है। जिससे आस्थावानों को इसकी चिंता होने लगी है। सूखे व पेयजल संकट से जूझ रहे जिले के मुख्यालय समेत आधा सैकड़ा गांव के लोगों की प्यास बुझाने वाली मंदाकिनी की हालत खराब होती जा रही है।
सूखे से जूझ रहे जनपद वासियों के लिए मंदाकिनी का जल जीवन प्रदान करता है। आज भी शहर के लोगों के साथ ग्रामीणों की प्यास इसी नदी के जल से बुझती है। कम बारिश से जहां किसान तबाह है, खेतों को पानी नहीं मिल रहा। वहीं नदी का जलस्तर भी कम हो रहा है।
रामघाट व भरतघाट से लेकर पुल घाट, बजरंग घाट के आसपास तो अक्सर जागरूक लोग सफाई अभियान चलाते हैं लेकिन कभी भी शंकर बाजार से लेकर बंधोइन की ओर जाने वाली नदी की हालत देखने की किसी को फुर्सत नहीं है। कुछ समाजसेवियों ने एक दिन पोस्टर के माध्यम से जागरूकता फैलाई थी, लेकिन फावड़ा किसी ने नहीं चलाया। जिससे नदी की हालत देखते ही आस्थावान दुखी होते हैं।