03- सीकेटीपी-03 पुलिस लाइन में जलती होलिका।
चित्रकूट/खोही। इस वर्ष होली का पर्व एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग के बीच मनाया जा रहा है। होलिका दहन के अगले दिन तीन मार्च को पूर्ण चंद्रग्रहण लगने के कारण रंगों की होली को लेकर विशेष सावधानी बरती गई। संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि होलिका दहन के बाद ऐसा पूर्ण चंद्रग्रहण करीब 100 वर्ष बाद बना है।
पंचांगों के अनुसार, मंगलवार दो मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्रग्रहण प्रभावी रहा। सूतक काल ग्रहण से नौ घंटे पहले ही प्रारंभ हो गया था। इसके चलते धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक कार्यक्रमों के समय में बदलाव किया गया। जिले में होलिका दहन दो मार्च की देर रात संपन्न हुआ।
सोमवार रात करीब 1:10 बजे निर्धारित स्थलों पर होलिका दहन किया गया। ग्रहण और सूतक के कारण सुबह से कोई मांगलिक कार्य या सार्वजनिक उत्सव नहीं हुए। हालांकि, कई स्थानों पर लोगों ने सीमित रूप में अबीर-गुलाल के साथ होली खेली। बुधवार तीन मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी।
मंदिरों के कपाट रहे बंद
ग्रहण और सूतक के प्रभाव के कारण चित्रकूट स्थित स्वामी कामतानाथ मंदिर और मत्तगजेंद्र नाथ मंदिर के कपाट बंद रहे। ये कपाट मंगलवार सुबह 6:30 बजे से शाम सात बजे तक बंद रखे गए। ग्रहण समाप्ति के बाद विधि-विधान से शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद ही मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
ग्रहण के बाद उत्सव
कामतानाथ मंदिर के मुख्य संत मदन गोपाल दास ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रहण के बाद भगवान को स्नान कराया गया। फिर उन्हें भोग लगाया गया। इसके साथ ही भक्तों के साथ मंदिर में होली का उत्सव भी मनाया गया।
03- सीकेटीपी-03 पुलिस लाइन में जलती होलिका।
03- सीकेटीपी-03 पुलिस लाइन में जलती होलिका।
03- सीकेटीपी-03 पुलिस लाइन में जलती होलिका।