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हर माह की 10 तारीख को मनेगा ग्रामीण पोषण दिवस

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स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए जरूरी है कि पहले मां को स्वस्थ बनाएं इसके लिए महिला के गर्भ धारण करने से लेकर दो वर्ष तक की आयु के बच्चों के परिवारों को पोषण व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक किया जाए।
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इसकी पूर्ति के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा जिले के 959 आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रत्येक माह की 10 तारीख को ग्रामीण पोषण दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कुपोषण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु व उसके जीवन के पहले दो वर्षों पर सबसे अधिक पड़ता है।
इसके बाद प्रयास करने पर भी कुपोषण को दूर करना कठिन हो जाता है। गर्भ में आने से लेकर जीवन के पहले दो साल की अवधि अर्थात जीवन के पहले 1000 दिन पोषण की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह अवधि बच्चों के सुपोषित भविष्य की नींव रखने का सुनहरा अवसर प्रदान करती है।
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उन्होंने बताया पोषण दिवस के दिन केंद्र पर आने वाली गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों और उनके परिजनों के बीच ऊपरी पूरक आहार पर चर्चा स्वस्थ बच्चा-बच्ची प्रतियोगिता, हेल्दी बेबी शो स्वस्थ मां प्रतियोगिता के साथ आठ माह पूर्ण कर चुकी गर्भवती व छह माह से ऊपर वाली धात्री माताओं के लिए मानक के बारे में लोगों को प्रोत्साहित करने की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
बाल विकास परियोजना अधिकारी पहाड़ी महेंद्र पटेल ने बताया छह माह के बाद बच्चों को ऊपरी आहार देने की शुरुआत करनी चाहिए। बच्चे की आयु बढ़ने पर भोजन की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
बच्चे को आहार खिलाते समय उनका पूरा ध्यान बच्चे पर ही रहे। टीवी व मोबाइल देखते हुए खाना नहीं खिलाना चाहिए। ऊपरी आहार में घर में उपलब्ध मौसमी खाद्य पदार्थों जैसे दाल, चावल, केला, आलू, हरी पत्तेदार सब्जियां, पीले फल व सब्जियां देनी चाहिए।
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