चित्रकूट। दो भाइयों पर बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में विशेष न्यायाधीश बिजली अधिनियम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सुनवाई में केस झूठा पाया। साथ ही विवेचकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बिजली विभाग के तत्कालीन जेई समेत सभी आरोपियों पर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। यह फैसला 17 साल बाद आया है।
पांच अप्रैल 2008 को तत्कालीन जेई कृष्णलाल ने कोतवाली में कर्वी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि शिवरामपुर निवासी प्रमोद जायसवाल व उसके भाई विनोद जायसवाल ने बिजली बकाया वसूली के दौरान कनेक्शन काटने गई टीम पर हमला किया। बिजली चोरी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई। इस मामले में विवेचक ने दोनों पर सरकारी रकम में बाधा पहुंंचाने व सहित कई धाराओंं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि तत्कालीन जेई कृष्णलाल, लाइनमैन मोहन लाल, कर्मचारी शंकर राम समेत विभागीय कर्मचारियों ने झूठे बयान दिए। विवेचक दरोगा चंद्रकांत उपाध्याय व प्रमोद कुमार पांडेय ने निष्पक्ष जांच नहीं की। इस मामले में विशेष न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने तत्कालीन जेई समेत सभी आरोपितों पर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए। उधर, इस मामले में अधीक्षण अभियंता आरके यादव बताया कि कोर्ट का निर्णय अभी नहीं मिला। प्रकरण काफी पुराना है। कौन कर्मचारी कहां तैनात है। ये बता पाना मुश्किल है।