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Chitrakoot News: दुष्कर्म मामले में गलत विवेचना पर प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश

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संवाद न्यूज एजेंसी
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चित्रकूट। रैपुरा थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में लापरवाही बरतने और एक निर्दोष व्यक्ति को फंसाने का प्रयास करने के आरोप में तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक और पर्यवेक्षणीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को आदेश की एक प्रति अपर मुख्य सचिव गृह एवं पुलिस महानिदेशक को भेजने का निर्देश दिए हैं।
यह मामला रैपुरा थाना क्षेत्र की एक मानसिक रूप से विक्षिप्त नाबालिग के साथ हुए दुष्कर्म से संबंधित है। अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष पॉक्सो एक्ट, रेनू मिश्रा ने इस मामले में दोषी पाए गए अगरहुडा निवासी छोटू उर्फ तेजप्रताप गुप्ता को 25 साल की कैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि, न्यायालय ने मामले की विवेचना प्रक्रिया पर नाराजगी व्यक्त की है। न्यायाधीश ने कहा कि मामले के विवेचक, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रमेश चंद्र ने अपने पदीय कर्तव्यों के विपरीत कार्य किया। आपराधिक कदाचार करते हुए उन्होंने एक निर्दोष व्यक्ति को झूठे और गढ़े गए साक्ष्यों के आधार पर मृत्युदंड तक से दंडनीय अपराध में फंसाने का प्रयास किया। इस प्रक्रिया में, वास्तविक अभियुक्त को विवेचना की शुरुआत से ही बाहर रखा गया था। रमेश चंद्र की रैपुरा थाना में 15 मार्च से 13 जून 2020 तक तैनाती रही।
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न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि विवेचक रमेश चंद्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और इस संबंध में न्यायालय को सूचित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, विवेचक रमेश चंद्र, तत्कालीन थाना प्रभारी धर्मराज यादव और तत्कालीन पर्यवेक्षणीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश की एक प्रति अपर मुख्य सचिव गृह और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को भेजी जाएगी।
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