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तीन सौमरीजों का इलाज कर रहा एक डाक्टर

Mon, 05 Sep 2016 10:41 PM IST
चित्रकूट
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जिला अस्पताल में दवा वितरण कक्ष मेें बैठे आपस में बातचीत करते स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि डायरिया-बुखार के मरीजों के इलाज की सभी प्राथमिक दवाएं और विशेषज्ञ डाक्टर अस्पतालों में मौजूद हैं। इन दावों की पोल जिला अस्पताल में खुलती दिख रही है। डायरिया होने पर सबसे पहले बच्चों को ओआरएस का घोल दिया जाता है लेकिन जिला अस्पताल में दो दिन से ओआरएस के पैकेट नहीं है।
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अस्पताल में दवा वितरण कक्ष मेें मौजूद स्टाफ दवा मांगने पर मरीजों व तीमारदारों को भगा देता है। मऊ के हालत और खराब हैं एक अकेले डाक्टर एक दिन में तीन सौ से अधिक मरीज का इलाज कर रहा है।


बारिश के बाद अस्पतालों में डायरिया-बुखार के ही मरीजों की संख्या बढ़ रही हैं। वहीं जिले में डेंगू भी पैर पसार रहा है। जिससे जिले के दो लोगों की मौत हो चुकी है और चार लोगाें में प्राथमिक लक्षण पाए जाने पर इलाज चल रहा है।
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जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बार-बार जिला अस्पताल व सीएमओ के साथ मीटिंग व मौके का निरीक्षण कर इन बीमारियों पर नियंत्रण के लिए सभी सावधानी अपनाने के निर्देश दे चुकीं हैं। इसके बावजूद जिला अस्पताल के हालात सुधरने नहीं रहे हैं। एक सप्ताह के अंदर अस्पताल में पांच सौ बुखार-डायरिया के मरीजों का इलाज हुआ है लेकिन मरीजों की संख्या घटने की बजाए बढ़ती जा रही है।


सीएमएस डा.एनके गुप्ता का दावा है कि सभी जरूरी दवाएं और कुशल डाक्टर मौजूद हैं लेकिन दो दिनों से अस्पताल में ओआरएस के पैकेेट गायब हैं। इसलिए जैैसे ही तीमारदार दवा वितरण कक्ष पहुंचता है तो वहां से खाली हाथ लौटना पड़ता है।


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत दिनों दिन खराब होती जा रही है। सोमवार को अस्पताल में सिर्फ एक डाक्टर असलम अंसारी ही मौजूद थे। दिन भर में 320 मरीज आए जिसमें 85 मरीज डायरिया-बुखार के थे। अस्पताल के प्रभारी डा. शेखर वैश्य ने बताया कि दो डाक्टरों का तबादला हो चुका है। उनके  पास सरकारी कामकाज ही इतना रहता है कि मरीज देखने का समय नहीं मिलता।


जिला अस्पताल के दवा वितरण कक्ष में मरीज व तीमारदारों के साथ मौजूद स्टाफ अभ्रद व्यवहार करता है। कपसेठी से रामबाबू और कोलगदिया के प्रकाश कुमार ने बताया कि डाक्टर ने जब दवा का पर्चा लिखा तो कक्ष में मौजूद स्टाफ ने आधे घंटे तक खड़ा रखा। इसके बाद ओआरएस पैकेट के लिए बताया स्टाक खत्म है कहकर भगा दिया।

तीमारदारों ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूद स्टाफ अपनी की बातों व मोबाइल में इतना व्यस्त रहते हैं कि लाइन मेें खडे़ मरीजों का ध्यान नहीं दिया जाता। इस मामले मेें सीएमएस डा.एनके गुप्ता ने बताया कि पूरे स्टाफ को मरीज व तीमारदार से सभ्य व्यवहार करने के निर्देश दिए गए हैं। दवा वितरण कक्ष के स्टाफ की शिकायत पर पूछताछ की जाएगी।
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