चित्रकूट। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदाकिनी में आई प्रलयकारी बाढ़ के बाद नदी के कैचमेंट (सीमांकन) क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण और अतिक्रमण पर रोक लगाने की बात कही।
उन्होंने साफ कहा कि नदी को उसका स्वाभाविक प्रवाह देने के लिए रास्ता देना होगा, नहीं तो ऐसी भयावह स्थिति दोबारा आ सकती है। इसे पूरी तरह रोकना होगा।
चित्रकूट दौरे के दौरान रामायण मेला प्रेक्षागृह में बाढ़ राहत कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि जब भी हम कैचमेंट में निर्माण करेंगे तो नदी अपना स्वरूप बदलेगी। अतिक्रमण होगा तो जो भी उसके दायरे में आएगा, सब बह जाएगा। नदी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। गर्मी-सर्दी में जल कम रहता है लेकिन बरसात में जल निकासी का मार्ग अवरुद्ध होने पर व्यापक नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि इतना पानी जन-धन की भारी हानि का कारण बन सकता था लेकिन प्रभु श्रीराम, कामतानाथ, हनुमान जी और ऋषि-मुनियों के तप के प्रताप से कोई जनहानि नहीं हुई। इसके लिए वह प्रभु के प्रति कृतज्ञ हैं। सीएम ने बताया कि बाढ़ बेहद विकराल थी।
गत वर्ष जहां पूरे मौसम में 307 मिमी बारिश हुई थी, वहीं इस बार एक ही दिन में 660 मिमी से अधिक बारिश हुई। मध्य प्रदेश के ऊपरी क्षेत्र से आए पानी से तीन से चार मंजिल के मकानों तक पानी चढ़ गया। बहुत से परिवार घर छोड़ना नहीं चाहते थे और छतों पर फंसे रहे, उन्हें सुरक्षित निकाला गया। दुकानों, घरों, खेती, मंदिरों और घाटों को भारी नुकसान हुआ। मध्य प्रदेश की ओर जाने वाला पक्का पुल तक बह गया। (संवाद)
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क्यों आती है मंदाकिनी में बाढ़
लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसके प्रसाद के अनुसार मंदाकिनी का कुल कैचमेंट क्षेत्र लगभग 1,956 वर्ग किमी है। यह मध्य प्रदेश के सतना जिले की पहाड़ियों (मझगवां) से शुरू होकर चित्रकूट होते हुए राजापुर में यमुना में मिलती है। सती अनुसूया आश्रम, जानकी कुंड, स्फटिक शिला और रामघाट की पहाड़ियों का पानी प्राकृतिक ढलान से मंदाकिनी में ही आता है।
अगस्त-सितंबर 2026 में ऊपरी कैचमेंट में हुई अतिवृष्टि का सारा पानी चित्रकूट की ओर आ गया। बुंदेलखंड सूखा क्षेत्र है। कैचमेंट के जंगल और पहाड़ सुरक्षित रहेंगे तो पानी जमीन में रिसेगा, भूजल बढ़ेगा और गर्मी में नदी नहीं सूखेगी। चित्रकूट की 70 फीसदी आबादी पीने के पानी के लिए इसी कैचमेंट पर निर्भर है। (संवाद)