फोटो- 8- शहर के पास खोह गांव का तालाब
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चित्रकूट। अच्छी जलवायु बनाए रखने में बुंदेलखड़ के तालाब कारगर साबित हो रहे हैं। विख्यात कवि घाघ ने तालाबों के बारे में अगहन चौगुन पूसे दून, माघ सवाई फागुन सून... वर्णित किया है। तालाब वाहनों से निकलने वाले कार्बन का उत्सर्जन सोख लेते हैं। इससे जलवायु अच्छी बनी रहती है। चित्रकूट में प्रतिवर्ष तालाब 607582.8 किलोग्राम कार्बन सोख लेते हैं। पर्यावरणविदों के अनुसार जितना पानी बोरवेल से लिया जाता है यदि तालाबों से लिया जाए तो वायु प्रदूषण बहुत कम फैलेगा।
पर्यावरणविद गुंजन मिश्रा के अनुसार तालाबों को बढ़ावा देकर बुंदेलखंड पेरिस समझौते में बड़ा सहयोग दे सकता है। वहीं कार्बन की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिल जाएगी। तालाबों का बड़ा फायदा किसानों को आर्थिक लाभ के रूप में मिलता है।
बुंदेलखंड में 17800 तालाब : बुंदेलखंड के 7 जिलों में करीब 14300 तालाबों में 3.85 करोड़ घनमीटर बारिश का पानी संचित हो रहा है। यदि किसानों के स्वयं बनाए तालाब जोड़ दिए जाएं तो इनकी संख्या 17800 पहुंच जाती है। तालाब पशु-पक्षी व वनस्पति की जैव विविधता बनाये रखने में सहायक होते हैं। उपजाऊ मिटटी का क्षरण रोकते हैं। भूजल समृद्ध करते हैं। सूखी नदी, नालों को अविरल बनाने में सहायक होते हैं।