चित्रकूट। भारत रत्न से सम्मानित नानाजी देशमुख एकात्म मानव दर्शन के शिल्पकार थे। वह कई साल तक संघ के प्रचारक के रूप में कार्य करने के साथ धर्मनगरी चित्रकूट क्षेत्र सहित अन्य स्थानों में कार्य किया।
ग्रामोदय विश्वविद्यालय सहित स्थानीय निवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्यमिता विद्यापीठ की स्थापना की। क्षेत्र के 500 गांवों के ग्रामीणों का जीवन सुधारने के लिए एक-एक दंपतियों को नियुक्त किया।
नानाजी देशमुख मुख्य रूप से महाराष्ट्र प्रदेश के जिला हिंगोली कडोली के रहने वाले है। इनका पूरा नाम चंद्रिका दास अमृतराव देशमुख था। यह 1934 में राष्ट्रीय स्वयं संघ से कार्यकर्ता बने। 1940 में यूपी के गोरखपुर में संघ प्रचारक के रूम में नियुक्त किए गए।
1950 में इन्होंने गोरखपुर में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की। 1951 में संघ के संगठन मंत्री बने। 1967 में समाज सेवी विनोबा भावे के साथ उत्तर प्रदेश में पदयात्रा निकाली। (संवाद)