चित्रकूट। शहर के करीब दो माह से लापता नगरपालिका कर्मी जगदीश प्रसाद को सोमवार को मथुरा-वृंदावन से सकुशल ढूंढ निकाला गया है। पुलिस की पूछताछ में जगदीश ने अपनी मर्जी से आश्रम में रहने की बात स्वीकार की है। उसने अपने अपहरण की बात को पूरी तरह नकार दिया है।
जगदीश प्रसाद 19 अप्रैल को अचानक लापता हो गए थे। उनके बेटे ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। काफी तलाश के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला। बाद में जगदीश की बेटी ने अपने एक दोस्त पर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बेटी ने बताया था कि दोस्त उसे परेशान कर रहा था और पिता को जान से मारने की धमकी दे रहा था। एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि अपहरण की प्राथमिकी के बाद आरोपी को पकड़ा गया था, लेकिन उससे कोई जानकारी नहीं मिली।
एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि 13 जून को जगदीश के साले को एक फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि जगदीश प्रसाद मथुरा-वृंदावन में उनके साथ रह रहे हैं। इस सूचना पर सर्विलांस, एसओजी और कोतवाली की संयुक्त टीम परिजन के साथ मथुरा-वृंदावन पहुंची। गौतम ऋषि आश्रम में जगदीश प्रसाद प्रसाद वितरण करते हुए मिले। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह अपनी स्वेच्छा से वहां आए थे और उनका अपहरण नहीं हुआ था।