उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां प्रसव के दौरान एक महिला की मौत हो गई। जबकि पूरा रात नवजात मां के शव से लिपटी रही। चित्रकूट के पहाड़ी कस्बे का मामला बताया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में सब कुछ चंगा है। आशा की डायरी में सर्वे पूरा है, सीएचसी में संस्थागत प्रसव का लक्ष्य सौ फीसदी है। लेकिन पहाड़ी कस्बे में हुई महिला की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल उठा दिया है।
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एक महिला बच्ची को जन्म देकर हमेशा के लिए सो गई, वहीं दुनिया में आने के बाद नवजात पूरी रात मां के शव से लिपटकर रोती रही। सगवारा गांव निवासी राजा निषाद मजदूरी करता है और पत्नी सरोज देवी (26) के साथ किराए के मकान में रहता था।
रविवार शाम सरोज घर पर अकेली थी। उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। न कोई आशा पहुंची, न एएनएम, न 102 एंबुलेंस। उसने फर्श पर तड़पते हुए अकेले ही एक बच्ची को जन्म दिया और अत्यधिक रक्तस्त्राव से दम तोड़ दिया। नवजात रात भर मृत मां के शव से लिपटी रोती रही। सीएचसी अधीक्षक का कहना है कि अस्पताल में प्रसूता को मृत अवस्था में लाया गया था। वजात का उपचार किया गया है।