चित्रकूट। संत मोरारी बापू ने श्रीराम कथा के चौथे दिन धर्मनगरी की विशेषताएं बताई। पवित्र मंदाकिनी को जीवनदायनी बताकर समझाया कि यह तैरने की जगह नहीं है बल्कि उसमें डूबने की जगह है। डूबना यानि उसकी गहराई में जाकर उसके तत्व को हासिल करना है। दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में संत मोरारी बापू ने कहा कि जीवन में मार्गदर्शक बनना चाहिए।
इसके लिए पांच लक्षण का होना अनिवार्य है। पहला एक ऐसे गाइड को साथ रखना जो चतुर कम हो समझदार ज्यादा हो। दूसरा भूल को स्वीकार करें। तीसरा जिसमें जीवन के नियम कम हों, व्रत ज्यादा हो। चौथा हमें गाइड करने में जिसका कोई निज स्वार्थ नहीं हो, उसको आनंद आये, उसका निमित्त मात्र बनने में। पांचवां ऐसे मार्गदर्शक का वरण करना जिसके मार्गदर्शन में जीने से विचार कम करें, चित्त में बार-बार विक्षेप हो, अहंकार कम हो जाऐ। ऐसा मार्गदर्शक पाकर जीवन कभी विफल नहीं होता। चित्रकूट की महिमा पर उन्होंने कहा कि चित्रकूट में भूत, वर्तमान, भविष्य लागू नहीं हो सकता है। कलियुग का जो प्रभाव दिखता है उसकी वजह हम है, चित्रकूट तीनों कालों से मुक्त है। चित्रकूट संतों की भी भूमि है। कभी कोई साधू किसी पर नाराज हो जाये तो बुरा नहीं मानना है, उसकी कठोरता क्षणिक रहती है। उसमें भी कोई हित छिपा रहता है। कथा आयोजक केके जालान और अखिलेश कुमार ने बताया कि बापू की रामकथा शाम को प्रतिदिन कथा मंडप में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रसिद्ध शायर उदय प्रताप सिंह लखनऊ, घनश्याम अग्रवाल मुंबई, बुद्धिसेन अग्रवाल इलाहाबाद , भार्गव शुक्ला लखनऊ से होने वाले मुशायरा में अपनी प्रस्तुति देंगे।