चित्रकूट के राजापुर में संत मोरारी बापू ने गोस्वामी तुलसीदास की हस्तलिखित रामचरित मानस के दर्शन किए। कहा कि राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में राजापुर को स्थान मिले, तभी विकास संभव है।
शुक्रवार को यमुना नदी में पूजन के बाद उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने तुलसी के जन्म विवाद का निपटारा करते हुए राजापुर चित्रकूट को ही उनका जन्मस्थान माना है।
तुलसी विश्व के एक महान संत थे। यदि तुलसी जन्मस्थली को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में शामिल कर दिया जाए तो क्षेत्र का विकास संभव हो सकता है। तुलसी परिक्रमा बनना बहुत आवश्यक है। भक्त परिक्रमा के माध्यम से भक्तियोग की तरफ आकर्षित होंगे। संत ने कहा कि पूरे भारतवर्ष में श्रावण शुक्ला सप्तमी को तुलसी जयंती मनाई जाती है।
जयंती को राजापुर चित्रकूट में मनाया जाए। भगवान राम के कर्मक्षेत्र चित्रकूट में नौ दिवसीय रामकथा 29 मई से शुरू हो रही है, जिसमें भगवान श्रीराम के तापस (तपस्वी) वेश पर विशेष कथा कही जाएगी। कोविड नियमों का पालन होगा। इस दौरान वाराणसी के तुलसी भक्त राजेंद्र पांडेय एवं साहित्यकार पूर्व शिक्षक रामगणेश पांडेय ने बापू को चार सूत्री तुलसी जन्मस्थली विकास के संदर्भ में एक मांगपत्र सौंपा।
विमल जालान, श्याम सुंदर मिश्रा, रामप्रसाद गर्ग, मनोज द्विवेदी, रामाश्रय त्रिपाठी, विष्णुकांत चतुर्वेदी, सुशील मिश्रा, आनंदी प्रसाद रुपौलिहा, बिहारीलाल अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, सोमनाथ अग्रवाल, अशोक सोनी, हरिमोहन सोनी, मोनू जायसवाल, समीर विश्वकर्मा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।