चित्रकूट। नवजात शिशु की तबियत खराब होने पर जच्चा-बच्चा को परिजन जिला अस्पताल लेकर आए। शिशु को चिकित्सकों ने एसएनसीयू में भर्ती किया। अचानक प्रसूता की हालत भी बिगडने लगी। परिजन इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे। उपचार न होने के चलते मां ने दम तोड़ दिया। गुस्साए परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। किसी तरह मामला शांत कराया गया।
मऊ थाना क्षेत्र के मंडौर गांव की प्रसूता आरती मौर्या (27) पत्नी सुनील कुमार ने मऊ सीएचसी में बच्ची को नौ अक्टूबर को जन्म दिया। सोमवार को अचानक बच्ची की हालत बिगडने पर परिजन जिला अस्पताल लाए। दोपहर दो बजकर 10 मिनट पर डाक्टरों ने बच्ची को एसएनसीयूू में भर्ती किया। मां और परिजन अस्पताल में मौजूद रहे।
इसी बीच अचानक मां के पेट में दिक्कत होने पर इलाज कराने के लिए तीमारदार इधर-उधर परेशान रहे। रात भर उपचार नहीं हो सका। महिला दर्द से कराहती रही। तड़के करीब साढ़े चार बजे जब हालत गंभीर हो गई तब चिकित्सकों ने इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना से गुस्साए परिजनों ने बवाल शुरू कर दिया। जेठानी अमिता मौर्या ने आरोप लगाया कि समय पर उपचार नहीं मिला। देवर देर रात तक इलाज के लिए भटकते रहे, किंतु किसी ने नहीं सुनी। जानकारी होने पर चिकित्सा अधिकारी समेत पुलिस बल मौके पर पहुंचे। किसी तरह परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद परिजन शव घर ले गए। बच्ची का इलाज चल रहा है।
सीएमएस डा. सुधीर कुमार शर्मा ने कहा कि महिला व उसके परिजन सोमवार को बच्ची को भर्ती कराने आए थे। महिला को कोई परेशानी नहीं थी। मंगलवार सुबह उसने पेटदर्द बताया तो डाक्टर ने दवा भी दी थी। इसके बाद परिजन महिला को लेकर चले गए थे। एसएनसीयू में उसकी बच्ची भर्ती थी। जिसकी देखरेख उसकी जेठानी कर रही थी। अचानक कुछ देर बाद महिला का पति उसे लेकर आया तो भर्ती किया गया लेकिन तब तब उसकी हालत बिगड़ चुकी थी। इसमें किसी डाक्टर या स्टाफ की गलती नहीं है। इस संबंध में डाक्टर व स्टाफ से पूरी जानकारी ली जा चुकी है।