महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में वैज्ञानिक कौशल के सुधार एवं विस्तार पर चल रही दो दिवसीय कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया। इसमें चार तकनीकी सत्रों में विचार-विमर्श किया गया। डा. एसके भटनागर ने कहा कि प्रकृति से सामंजस्य बनाकर कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से बचाव संभव है।
कार्यशाला में डा. नीरज वर्मा ने पौधों में होने वाली बीमारियों की जानकारी दी। बताया कि पौधों को बायो सेल की तरह उपयोग किया जा रहा है। विश्वविद्यालयों के शोध छात्रों अलका कटियार, एसके त्यागी, अक्षयवत भट्ट, राहुल मिश्रा, नीतामनि व नवीन कुमार आदि ने शोधपत्र पढ़े। प्रो. यूसी श्रीवास्तव ने नवोदित शोध छात्रों को पत्रिकाओं के चयन, उनके मूल्यांकन और महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
प्रो. राजाराम यादव ने नैनो टेक्नोलॉजी एवं एलईडी के महत्व को ग्रामीण विकास से जोड़ा। डॉ. उमेश शुक्ला ने कौशल को परिभाषित किया। डा. विजय प्रताप सिंह ने आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और उनकी उपयोगिता पर जोर दिया। डा. पीके पटेरिया ने वर्कशॉप और स्किल डेवलपमेंट पर चर्चा की। अध्यक्षता डॉ पीके पटेरिया ने की। डा. स्वर्णलता शर्मा ने धर्म एवं विज्ञान को परस्पर पूरक बताया। कृषि संकाय के अधिष्ठाता डा. अरूप दास गुप्ता ने संगोष्ठी और कार्यशाला के अंतर को स्पष्ट किया। डा. एसके चतुर्वेदी ने कौशल प्रसार के विषय में बताया।
जीव विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एसएन मिश्रा ने जैव विविधता के संरक्षण और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सतत ग्रामीण विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है। कार्यशाला का संचालन डा. वंदना पाठक ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अजय कुमार ने किया।