जनवरी माह में रविवार को लोग सुबह से शाम तक घर से बाहर नहीं निकले। धूप नहीं निकली। सुबह से दोपहर तक चारों तरफ कोहरे का धुंध नजर आया। सर्द हवाओं ने लोगों को बेहाल किया। स्कूल, कालेज व कार्यालय बंद थे, लेकिन व्यापारी, मजदूर वर्ग को अलाव के सहारे दिन गुजारना पड़ा। मुख्यालय व आसपास के कस्बों में अलाव की संख्या कम और लकड़ी पड़ गई। शहर में ट्रैफिक नहीं दिखा और ट्रेनों की रफ्तार धीमी थी।
शनिवार शाम से ही मौसम बदलने का आसार लगने लगा था। रविवार की सुबह विस्तर छोड़कर लोग जैसे ही घर से बाहर निकले तो कोहरा व सर्द हवाओं ने उन्हें दोबारा घर में कैद कर दिया। इस सीजन रविवार पहला दिन रहा कि दोपहर तक सूरज नहीं निकला। बेहतर यह रहा कि रविवार का अवकाश होने के कारण विद्यालय व कार्यालय बंद थे, लेकिन व्यापारी व मजदूर वर्ग ठंड से कंपकंपाते रहे।
दुकानदारों ने लकड़ियों की व्यवस्था कर दुकान के बाहर अलाव की व्यवस्था की तब जाकर कुछ राहत महसूस की। दोपहर बाद जब सूरज निकला तो बाजार में मामूली चहल पहल दिखी इसके बाद फिर रौनक गायब हो गई। मुख्यालय व आसपास के क्षेत्र में जहां अलाव जल रहे थे। वहां लोगों की भीड़ जुटी रही। आग के सहारे लोग ठंड दूर करने का प्रयास करते रहे। बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन के पास अलाव की व्यवस्था कम होने से यात्री ठंड से परेशानी रहे।
रविवार को घना कोहरा व सर्द हवाओं के चलते दिन में लाइट जलाकर धीमी गति से वाहन निकले। कोहरे का सबसे अधिक असर रेलवे संचालन पर पड़ा। मुंबई-हावडा व झांसी-कानपुर मार्ग की लगभग सभी ट्रेन करीब तीन से चार घंटे विलंब रही। इससे यात्रियों को ठंड में कई घंटे रेलवे स्टेशन पर बिताना पड़ा।
कोहरा व शीतलहर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार को कड़ाके की ठंड रही। इसके बावजूद किसानों के चेहरों पर रौनक दिखी। किसानों ने बताया कि ऐसा ही मौसम रहा तो गेहूं निश्चित तौर पर अच्छा होगा। इस मौसम का लाभ फसल को मिलेगा। कोहरे और नम मौसम से अन्य फसलों को भी लाभ होगा।