फोटो न- 15 सीकेटीपी 22 शहर में निकलती जगन्नाथ यात्रा। स्रोत: आर्काइव।
चित्रकूट। भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा 16 जुलाई से चित्रकूट में शुरू होगी। नौ दिन तक चलने वाली यह यात्रा शहर के तरौंहा स्थित जगदीश मंदिर से आषाढ़ माह की अमावस्या पर निकलती है। तीन सौ साल से चली आ रही यह परंपरा स्थानीय लोगों की आस्था और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह रथयात्रा हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। भक्तगण पुष्प वर्षा के बीच सैकड़ों की संख्या में विशाल रथों को रस्सियों से खींचते हैं, जो उनकी अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। जयदेव दास अखाड़ा मंदिर के पुजारी रमाशंकर ने बताया कि इस वर्ष भी यात्रा 16 जुलाई से प्रारंभ होगी। यह यात्रा अपने पहले दिन पुरानी बाजार के धुस मैदान पहुंचेगी। दूसरे दिन कच्ची छावनी और तीसरे दिन एलआईसी चौराहा तक का सफर तय करेगी। इसके बाद यात्रा सोनेपुर होते हुए पंचमी को गुंडिचाधाम पहुंचेगी। यहां आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं और विशाल मेले का आयोजन होता है। षष्ठी के दिन से यात्रा उसी रास्ते से लौटकर नौवें दिन पुनः जगदीश मंदिर पहुंच जाएगी। स्थानीय वृद्ध बडकू महाराज और दुर्गेश खंगार ने बचपन से इस यात्रा को निकलते देखा है। 70 वर्ष की आयु पार करने के बाद भी वे इसमें पूरे उत्साह से भाग लेते हैं। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवारों के लिए उत्सव मनाने का अवसर भी है।
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मेला और भंडारे का आयोजन : रथयात्रा के दौरान लगने वाला मेला विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि सोनेपुर गांव में लगने वाले इस मेले में ग्रामीण उत्साह से भाग लेते हैं। वे स्वयं अपने हाथों से रथ को खींचते हैं, जो उनकी भक्ति को दर्शाता है। मेले के समापन पर मंदिर के अखाड़ा परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। यहां सभी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं, जो आपसी भाईचारे और सेवा भाव का प्रतीक है।