अतिक्रमण हटाने के नाम पर पुलिस की पिटाई से व्यापार मंडल का फूटा गुस्सा
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अतिक्रमण हटाने के नाम पर पुलिस प्रशासन ने व्यापारियों पर जमकर लाठियां चटकाईं। साथ ही पुलिसकर्मियों ने दुकानों की सामग्री फेंक दी। इससे नाराज व्यापारियों ने एसपी से मुलाकात की। एसपी ने जब घटना की जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर व्यापारियों का गुस्सा शांत हुआ।
शहर के बस स्टैंड से लेकर पुरानी बाजार की ओर सड़क के दोनों ओर दुकानों के आगे अतिक्रमण हटाने के लिए सीओ के नेतृत्व में पुलिस टीम निकली। रविवार को चले अभियान के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस टीम की व्यापारियों से नोंकझोंक होने लगी। पहले मिथिला भोजनालय के पास पुलिस कर्मियों ने दुकानदार की कुर्सी मेज फेंक दी। विरोध किया तो दुकानदार को पुलिस वाहन में बैठा लिया।
इसके बाद पवन गेस्ट हाउस के पास लोहे और बाक्स की दुकान के मालिकों पर लाठियां चटकाई। दुकानदार रवि कुमार और शशी ने आरोप लगाया कि सीओ ने खुद लाठियां चटकाईं।
आक्रोशित दुकानदारों ने पुलिस का विरोध किया और एकजुट हो गए। पुलिस तीन व्यापारियों को कोतवाली ले आई।
जानकारी होते ही व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष पंकज अग्रवाल महामंत्री ओम केशरवानी और युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष राहुल गुप्ता मौके पर पहुंचे। पुलिस कार्यवाही का विरोध कर नारेबाजी शुरू की। उनका कहना था कि अतिक्रमण हटाने का मतलब लोगों को सताना नहीं।
बस स्टैंड के पास एकत्र आक्रोशित व्यापारियों को कोतवाल रनवीर सिंह समझाने पहुंचे। उन्होंने व्यापारियों से तत्काल तीनों को छोड़ने और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही लेकिन व्यापारियों की नाराजगी बढ़ती गई।
गंभीर हालात देखकर एसपी केके चौधरी ने सभी व्यापारियों को कैंप कार्यालय बुलाकर घटना की जानकारी ली। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष ने घटना की निंदा की।
बिना शर्त सभी को छोड़ने और दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कराने की मांग की। एसपी ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराएंगे। सीओ ने लाठीचार्ज कर गलती तो की है। अतिक्रमण हटाने का मतलब व्यापारियों को पीटना नहीं है। दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई का आश्वासन दिया।