चित्रकूट। घर में काम कर रही मां को कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के नाम लेकर बेटे ने पूछा कि इनमें दर्शन करने गई हो। इतना सुनते ही मां के आंखों में आंसू आ गए और बोली, बेटा आज तक मैं अपने घर के पास वाले मंदिर भी नहीं जा सकी हूं। यह बात बेटे को छू गई। उन्होंने तय किया कि वह मां को देश ही नहीं विदेश के मंदिरों का भी दर्शन कराऊंगा।
हम यहां बात कर रहे हैं आधुनिक युग के श्रवण कुमार कर्नाटक (मैसूर) निवासी कृष्ण कुमार की, जो अपनी 72 साल की मां चूड़ारत्ना को स्कूटर में बैठाकर देश और विदेश के तीर्थ स्थलों का भ्रमण करा रहे हैं। पांच साल से 50 हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा कराने के बाद बुधवार को मां-बेटे चित्रकूट पहुंचे। दोनों ने बताया कि यहां आने से आध्यात्मिक शांति मिली है। बताया कि तीन देशों नेपाल, भूटान और म्यंमार के धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर चुके हैं।
42 साल के एमसीए कृष्ण कुमार बताते हैं कि वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। कर्नाटक राज्य के मैसूर में 10 लोगों का संयुक्त परिवार है। बताया कि मां को तीर्थस्थलों का भ्रमण कराने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया। कंपनी वालों ने बहुत समझाया, लेकिन जब मां के बारे में बताया तो सभी ने उसका हौसला भी बढ़ाया। हेलीकाप्टर, ट्रेन या अन्य साधन से यात्रा कराने के लिए पैसा न होने पर वे अपनी पुरानी स्कूटर से ही मंदिरों के भ्रमण के लिए निकल पड़े। 16 जनवरी 2018 को कर्नाटक से शुरू यह धार्मिक यात्रा नेपाल, भूटान और म्यांमार के मंदिरों तक होने के बाद भारत के कई राज्य तक घूम चुकी है। 5 अप्रैल 2023 को चित्रकूट पहुंंचे मां-बेटे को देखकर और उनके संकल्प को जानकर सभी प्रभावित हुए। आधुनिक श्रवण (कृष्ण कुमार) ने कहा कि वह युवाओं को संदेश देना चाहते हैं कि माता-पिता धरती के भगवान हैं। सभी को उनकी सेवा करना चाहिए। (संवाद)