मानिकपुर (चित्रकूट)। किराने की दुकान और खोये का व्यापार करने वाले एक शख्स की सरेराह अगवा कर हत्या कर दी गई। बुधवार सुबह व्यापारी द्वारा फोन से खुद को अगवा किए जाने की सूचना घर वालों को देने पर पुलिस तलाश में जुटी लेकिन बचाने में कामयाब नहीं हो सकी। शाम को जंगल में शव मिला। वारदात के पीछे फिरौती और डकैतों के हाथ के अभी कोई संकेत नहीं मिले हैं।
वारदात का शिकार हुए रानीपुर गांव के मूल निवासी व्यापारी अंतिम लाल कुशवाहा। मानिकपुर कस्बे में स्थित घर में किराने की दुकान संचालित करने वाले अंतिम घूम-घूमकर खोयेे का व्यापार भी करते थे। घर वालों के मुताबिक बुधवार सुबह लगभग 7:30 बजे वह खोयेे के व्यापार के लिए मानिकपुर स्थित घर से बाइक से निकले थे। करीब आधे घंटे बाद उन्होंने अपने फोन से घर वालों को सूचना दी कि उन्हें कुछ बदमाशों ने पकड़ लिया है। फोन कटने के बाद लगातार स्विच ऑफ मिलता रहा।
घर वालों की सूचना पर पुलिस तलाश में लगी। क्षेत्र में फिरौती के लिए डकैतों द्वारा अगवा किए जाने की पुरानी वारदातों के मद्देनजर एसपी अंकित मित्तल खुद फोर्स के साथ छानबीन के लिए जंगलों में पहुंच गए। पुलिस की खोजबीन के बीच शाम करीब चार बजे क्षेत्र के चरवाहों ने जंगल में शव पड़ा होने की जानकारी दी। पुलिस ने जंगल में मरवरियादाई मंदिर के पास से शव बरामद किया। व्यापारी के पेट व पैर में गोली लगी थी। बाइक रानीपुर से मानिकपुर जाने वाली सड़क पर मिली है। बाइक पर खोया भी लदा था। मोबाइल फोन शव के पास पड़ा था। जेब से रकम भी नहीं निकाली गई थी।
व्यापारी की अपहरण बाद हत्या की जानकारी मिलते ही डीआईजी दीपक कुमार भी मौके पर पहुंचे। वारदात में शामिल लोगों तक जल्द पहुंचने के निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि घटना के पीछे डकैत गिरोह की सक्रियता का कोई सुराग नहीं लगा है। घर वालों तक फिरौती की कोई कॉल भी नहीं पहुंची। रंजिश में हत्या का मामला लग रहा है। हालांकि घर वाले किसी से झगड़े या रंजिश से इन्कार कर रहे हैं।
चलता रहा मोबाइल पर नहीं पा सके लोकेशन
चित्रकूट/मानिकपुर। खोवा व्यापारी अंतिम लाल कुशवाहा की नये साल के पहले ही दिन गांव से मानिकपुर की ओर खोवा लेकर यात्रा अंतिम यात्रा साबित हुई। घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी मची है। कुछ लोगों ने इसे किसी नवोदित गैंग द्वारा की गई वारदात बताया लेकिन यह पूरी तरह से गलत साबित हुई। पुलिस का दावा है कि यह अपहरण सिर्फ हत्या करने के मकसद से ही की गई थी। आरोपियों को जल्द पकड़ लिया जाएगा। इस मामले में पुलिस की सर्विलांस टीम की कार्यशैली पर भी सवाल उठे। अपहरण के बाद मृतक का मोबाइल चालू रहा लेकिन उसकी लोकेशन पुलिस नहीं ढूंढ पाई। अभी तक परिजनों ने किसी से दुश्मनी या कर्ज आदि जैसी कोई बात नहीं बताई है।
बुधवार की सुबह जब खोवा व्यापारी गांव से खोवा लेकर मानिकपुर की ओर आ रहा था तो रास्ते में उसे पकड़ा गया। मृतक की पत्नी प्रतिभादेवी व पुत्र संजीव के अनुसार सुबह लगभग आठ बजे अंतिम लाल कुशवाहा के ही मोबाइल से फोन आया। जिसमें अंतिम लाल ने कहा कि उसके कुछ लोग पकड़े लिए जा रहे हैं लगता है यह उसकी हत्या कर देंगे। इसके बाद फिर उनसे बातचीत नहीं हो सकी। परिजनों ने बार बार यह बात बताई कि इसके बाद कई बार अंतिम लाल के मोबाइल पर घंटी जाती रही लेकिन फोन उठा नहीं। इसकी जानकारी पुलिस को तुरंत दी गई थी। इससे तो यह स्पष्ट है कि सर्विलांस टीम ने सही तरीके से प्रयास नहीं किया अन्यथा जंगल में ही मोबाइल की लोकेशन के हिसाब से पुलिस अपराधियों व अपहृत को ढूंढ सकती थी। अज्ञात अपराधियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
खोवा व्यापारी का अपहरण फिर हत्या मामले में यह स्पष्ट हो रहा है कि हत्या के उददेश्य से ही उसे पकड़ा गया था। मोबाइल से बातचीत के दौरान मृतक ने भी यही आशंका परिजनों से बताई थी। अपहरणकर्ताओं ने किसी प्रकार की फिरौती की मांग भी नहीं की। जल्द उसका मोबाइल स्विच आफ भी नहीं किया और अपहृत को परिजनों से बातचीत करने की छूट दी। हत्या करने की बात रास्ते मेें अपहरणकर्ताओं ने कही होगी तभी अपहृत ने परिजनों से कहा था कि लगता है उसकी हत्या कर देंगे। पुलिस अधीक्षक अंकित मित्त्तल ने भी इस बात को माना है कि पकड़ कर ले जाने वाले अपराधियों का मकसद हत्या ही करना लगता है। इसके पीछे किसी पुरानी रंजिश का मामला है। जांच पड़ताल में सब सामने आ जाएगा। मृतक का सारा सामान भी सुरक्षित बरामद हुआ है।
मृतक का मोबाइल, जेब में रखी नगदी, शरीर के पूरे कपड़े आदि हूबहू उसी तरह मिले हैं अपराधियों ने इससे किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की है। यहां तक कि बाइक व खोवा तो पहले ही रास्ते में छोड़ दिया था। यह भी अपराधी समझ गए थे कि भारी पुलिस बल आसपास के जंगल में आ गया है इसीलिए उन्होंने अपहृत को अपहरण के एक डेढ़ घंटे बाद ही गोली मारकर फेंक दिया। अपहरण वाले स्थान के लगभग दो किमी के दायरे में उसका शव बीच घने जंगल में मिला है। इस घटना से यह भी लगता है कि हत्यारे इस जंगल के रास्ते से परिचत हैं तभी उन्होंने पुलिस के आने के पहले ही अपना काम कर सुरक्षित भागने में सफल रहे।