चित्रकूट। अभी तक डकैतों के लिए बारिश का महीना काल रहा है। जुलाई-अगस्त माह में ही सर्वाधिक कुख्यात डकैतों में ददुआ से लेकर ठोकिया तक का खात्मा भी हुआ है।
पाठा क्षेत्र से लेकर विंध्य पर्वत की श्रंखलाओं से आच्छादित बीहड़ में बारिश के दिनों में सौ मीटर की दूरी पर मौजूद लोगों को ढूंढना आसान नहीं होता है। जुलाई अगस्त माह में बारिश के बाद जंगल के पेड़ पौधे व झाड़ियां घनी हो जाती हैं। रास्ते जलभराव वाले हो जाते हैं खूंखार जानवर भी बाहर घूमने लगते हैं। ऐसे में इन्हीं जंगल में छिपे कुख्यात डकैतों को मार गिराना इन माह में आसान नहीं होता है। बैठकों में भी बारिश से पूर्व कार्रवाई का जिक्र होता है। सच्चाई बिल्कुल इसके विपरीत है।
कुख्यात ददुआ साल 2007, डाकू ठोकिया साल 2008, डाकू रागिया 2011, डाकू बलखडिया 2014 फिर डाकू बबुली लवलेश साल 2019 में मारे गये। यह सभी बरसात के मौसम में मारे गए। अब बीहड़ क्षेत्र में इकलौता सूचीबद्ध डाकू गौरी गैंग ही बचा है। इधर दो माह से गैंग की सक्रियता बढ़ने पर इसे पकड़ने के लिए चित्रकूट व सतना पुलिस टीमें लगातार काम कर रहीं हैं।
पांच लाख के इनाम के बाद ही मारे जाते कुख्यात डाकू
चित्रकूट। मारे जा चुके डाकू ददुआ, ठोकिया, रागिया, बलखड़िया, बबुली सभी पांच लाख के इनामी डाकू थे। इनकी मौत भी इतना इनाम होने के बाद ही हुई है। अब गौरी यादव पर भी पांच लाख का इनाम हो चुका है। यूपी एमपी मिलाकर वह साढे़ पांच लाख का इनामी बन गया है। ऐसे में पूरी संभावना है कि अब पुलिस इसे भी ढेर कर सकती है।
पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल ने कहा कि यह गलत है पुलिस हमेशा अपराध रोकने के लिए काम करती है। कई बार पुलिस सामाजिक बंधन में इंसान को सुधरने का मौका देती है लेकिन अपराध कभी क्षम्य नहीं होता है। किसी भी अपराधी को शुरू से ही पकड़ कर जेल भेजने या फिर मार गिराने का काम लगातार पुलिस टीमें करती रहीं हैं। डाकू गौरी यादव गैंग को भी पूरी मुस्तैदी के साथ टीमें खोजबीन कर रहीं हैं जल्द ही उसे भी मार गिराया जाएगा।