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Chitrakoot News: झांसी सतर्कता अधिष्ठान ने विभाग से मांगे दस्तावेज

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चित्रकूट। 18 लाख के गबन में तत्कालीन डीएम, सीडीओ, पीडी समेत नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। एनजीओ का पंजीयन निरस्त होने के बावजूद अध्यक्ष ने अधिकारियों को प्रभाव में लेकर तीन कार्यों का ठेका ले लिया। इतना ही नहीं बिना कार्य कराए भुगतान भी करा लिया। शिकायत पर झांसी सतर्कता अधिष्ठान ने जांच शुरू की तो मामले का खुलासा हुआ। जांच टीम ने चित्रकूट से संबंधित विभाग से कामों की सूची व विवरण मांगा है।
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फैजाबाद की स्वयंसेवी संस्था पर्यावरण एवं ग्राम्य विकास अभियंत्रण सेवा संस्थान का पंजीयन 16 अक्तूबर 2001 को निरस्त हो गया था। इसके अध्यक्ष टिकैतनगर बाराबंकी निवासी देवनारायण तिवारी ने सन 2004 मेंं चित्रकूट जिले में कुछ परिचितों और क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से ठिकाना बनाया। अध्यक्ष ने धीरे-धीरे डीएम और सीडीओ तक पहुंच बना ली।
इसके बाद जिला ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग के माध्यम से खेल शुरू हुआ। संस्था के माध्यम से 7 जनवरी 2003 से 20 मार्च 2004 तक सांसद निधि से 1,02400 रुपये निकाले गए। इसके अलावा अन्य कामों के लिए संपूर्ण रोजगार योजना से 14,57000 रुपये और आईआरडीपी अवस्थापना मद से 3,38000 रुपये निकाला गया।
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सतर्कता अधिष्ठान झांसी के जांच अधिकारी अतुल कुमार के अनुसार इन कामों का आवंटन और भुगतान कागजों में हो गया। जमीन पर ये काम नहीं मिले। तत्कालीन डीएम से लेकर सीडीओ व अन्य नौ अधिकारियों और कर्मचारियों ने संस्था के पंजीयन अथवा कार्य स्थल पर हुए कामों को जानने का प्रयास नहीं किया। इसका 18,97000 रुपये भुगतान हुआ। जांच हुई तो शिकायत सही मिली। इस पर तत्कालीन डीएम ओमसिंह देशवाल, सीडीओ भूपेंद्र त्रिपाठी, पीडी प्रेमचंद्र द्विवेदी, संस्था के अध्यक्ष समेत नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट की गई है। इस मामले में झांसी में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सतर्कता अधिष्ठान टीम ने जांच शुरु कर दी है। चित्रकूट के संबंधित विभाग से सभी कामों का विवरण व भुगतान की सभी रिपोर्ट मांगी है।
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