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भरत चरित्र श्रवण करने मात्र से जीवन में संजीवनी मिलती है . मोरारी बापू’

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चित्रकूट। मानव जीवन की संजीवनी भरत चरित्र है। इसका अनुसरण करने वाला कभी दुखी नहीं रहेगा। प्रभु उसके सारे कष्ट दूर करेंगे। यह बात संत मोरारी बापू ने चित्रकूट के आयोग्यधाम में कही।
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दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम परिसर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन मंगलवार को संत मोरारी बापू ने चित्रकूट की महिमा पर कहा कि चित्रकूट में भूत वर्तमान भविष्य लागू नहीं हो सकता है। कलयुग का जो प्रभाव दिखता है उसकी वजह हम हैं। चित्रकूट तीनों कालों से मुक्त है क्योंकि यह भगवान की विहार भूमि रही है। यहंॉ भगवान कण कण में है। चित्रकूट संतों की भी भूमि है। कभी कोई साधू किसी पर नाराज हो जाये तो बुरा नहीं मानना है उसकी कठोरता क्षणिक रहती है। उसमें भी कोई हित छिपा रहता है। भरत का चरित्र श्रवण करने मात्र से जीवन में संजीवनी मिलती है। रामकथा के आयोजक मंडल के सदस्य वाराणसी के समाजसेवी किशन जालान, सूर्यकांत जालान, करुणेश खेमका, सतुआ बाबा, अखिलेश खेमका कोविड नियमावली का पालन करते हुए कथा की व्यवस्थाओं को मूर्त रूप दे रहे हैं।
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