प्रदेश सरकार की एंबुलेंस सेवा काफी सफल है लेकिन स्थानीय कर्मचारी इसमें लीपापोती करने में कोई कसर नहीं उठा रखते। जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। मंगलवार को एक नहीं दो ऐसे मामले सामने आए।
एक में लगभग डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस न पहुंचने पर घर के दरवाजे के पास ही प्रसूता ने बच्चा जना और दूसरे में रेफर के बाद बुखार पीड़ित मरीज दो घंटे तक अस्पताल में पड़ा रहा।
जानकारी के अनुसार सदर ब्लाक के भसौंधा गांव के बंशीपुरवा की सुनीता वर्मा (24) पत्नी विनोद को मंगलवार को तड़के तेज प्रसव दर्द हुआ।
सास बेसनिया देवी ने बताया कि मोबाइल से 102 एंबुलेंस को सूचना दी गई। लेकिन लगभग डेढ़ घंटे तक कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसी बीच प्रसव दर्द बढ़ने पर प्रसूता ने घर के दरवाजे के पास ही बच्चा जना। इसके बाद एंबुलेंस पहुंची।
जिससे जच्चा-बच्चा को शिवरामपुर पीएचसी लाया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि यहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने चिकित्सक न होने की बात कहकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों ने बताया कि जिला अस्पताल में भी जच्चा-बच्चा को लेकर काफी देर तक भटकते रहे।
इसके बाद दोनों को भर्ती किया गया। दोनों की हालत सामान्य बताई गई है। इसके अलावा जिला अस्पताल में भर्ती रामादेवी (28) पत्नी सुरेश कुमार निवासी गडरियनपुरवा बदौसा बांदा को भी मंगलवार को लगभग दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिली। सुरेश ने बताया कि पत्नी 15 दिनोें से बुखार से पीड़ित है।
जिसे जिला अस्पताल में दो और निजी अस्पताल में दो बोतल खून भी चढ़ाया जा चुका है। मंगलवार को ज्यादा हालत खराब होने पर डाक्टरों ने उसे इलाहाबाद रेफर किया। इसके लिए 108 एंबुलेंस को सूचना दी लेकिन दो घंटे तक कोई एंबुलेंस नहीं आई। जिससे उसकी पत्नी की हालत बिगड़ती गई।
इसके बाद एंबुलेंस आने पर उसे इलाहाबाद भेजा गया। वहीं दोनों मामलों में सीएमओ डा.रामजी पांडेय ने बताया कि एंबुलेंस का संचालन सीधे संबधित विभाग के लखनऊ कार्यालय से होता है। दोनों शिकायतें मिली हैं। जिसकी जानकारी संबधित अधिकारियोें को दी गई है। जिसकी जांच कराकर कार्रवाई होगी।